बलरामपुर। केंद्रीय बजट में जिले से गुजरने वाले रेलमार्ग के दोहरीकरण की सौगात मिली है। बलरामपुर से गोंडा तक का रेलमार्ग अभी एकल है, जिससे इस रूट पर मांग के अनुसार ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर के नकहा जंगल-बढ़नी-बलरामपुर-गोंडा तक के 215 किलोमीटर लंबे रूट के दोहरीकरण की स्वीकृति दी है, जिससे लोगों में खुशी है।
पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर बोर्ड ने मुहर लगाते हुए 4.3 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया है। इस रूट का दोहरीकरण होने से ट्रेनों का संचालन और आसान हो जाएगा। वर्तमान में इस रूट पर एक दर्जन से अधिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं। सिंगल ट्रैक होने की वजह से इस रूट पर ट्रेनों का लोड और नहीं बढ़ पा रहा है। यात्री ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों के संचालन की भी राह आसान हो जाएगी।
रेलवे स्थापना के बाद से गोरखपुर-बढ़नी-गोंडा रूट के मीटर गेज पर ट्रेनें दौड़ती थीं। इस रूट पर 2002 में ब्रॉड गेज लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था। 2014 में काम पूरा होने के बाद से ब्रॉड गेज लाइन पर ट्रेनें दौड़ने लगीं। उसके करीब आठ साल बाद इस रूट पर विद्युतीकरण का काम शुरू हुआ जो 2023 में पूरा हो गया। 2023 से इस रूट पर विद्युत इंजन वाली ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया। गोरखपुर से बढ़नी रूट पर दिल्ली, मुंबई के साथ ही आधा दर्जन से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनें भी चलती हैं, जो बलरामपुर से होकर गुजरती हैं। गोरखपुर से दिल्ली जाने वाली सबसे अहम ट्रेन हमसफर है जबकि मुंबई के लिए पनवेल एक्सप्रेस रोजाना चलती है। सबसे बड़ी बात ये है कि जब गोरखपुर-बस्ती रूट पर कोई ब्लाॅक होता है तो बढ़नी रूट पर ही अधिकतर ट्रेनें डायवर्ट कर दी जाती हैं। एकल रेलमार्ग होने से दिक्कत होती थी, अब दोहरीकरण होने के बाद इस रूट पर सहूलियत मिलेगी।
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड से रेलमार्ग के दोहरीकरण के लिए सर्वे कराने का निर्देश मिला है। सर्वे के बाद दोहरीकरण की पूरी कार्ययोजना भेजी जाएगी।