गोंडा। मंडलायुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने एल्गिन ब्रिज-चरसड़ी तटबंध के निर्माण तथा अन्य गड़बड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए अपर आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता और निर्माण खंड-एक के अधिशासी अभियंता को सदस्य नामित किया गया है। मंडलायुक्त ने समिति से 15 दिन के भीतर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने को कहा है।
अधिवक्ता अवधराज सिंह ने मंडलायुक्त को सौंपे शिकायती पत्र में कहा था कि एल्गिन ब्रिज-चरसड़ी तटबंध का निर्माण कार्य वर्ष 2006-07 में शुरू हुआ था। प्रारंभिक सर्वेक्षण में तटबंध की कुल लंबाई 55 किलोमीटर तय की गई थी। आरोप है कि निर्माण के समय तत्कालीन प्रभावशाली लोगों और किसानों के दबाव में तटबंध की दिशा बदल दी गई। इससे कई मजरे तटबंध के अंदर आ गए और घाघरा नदी व तटबंध के बीच की दूरी मानक से काफी कम रह गई। नदी का सीधा दबाव तटबंध पर पड़ने के कारण यह लगातार कमजोर होता गया।
आरोप है कि दिशा बदलने से तटबंध की लंबाई बढ़कर लगभग 60 से 65 किलोमीटर हो गई, लेकिन उसकी मजबूती पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। जब भी तटबंध टूटने की स्थिति आती है, तब स्थानीय स्तर पर बोल्डर और बालू की बोरियां डालने की स्वीकृति दी जाती है। इसके लिए आकस्मिक धनराशि भी उपलब्ध कराई जाती है।
आरोप है कि वास्तविकता में जितनी सामग्री तटबंध पर लगाई जाती है, कागजों पर उससे कई गुना ज्यादा दिखाई जाती है। मामले की जांच के आदेश से एक बार फिर संबंधित विभाग में खलबली मच गई है।