नवाबगंज के ब्योंदा माझा में भरा बाढ़ का पानी। - संवाद
करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी के घटने-बढ़ने का सिलसिला जारी है। अब नदी खतरे के निशान के बराबर चल रही है। शनिवार शाम तक सरयू नदी खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई थी जो रविवार सुबह तक दो सेंटीमीटर घटकर मात्र एक सेंटीमीटर ऊपर रह गई। शाम तक पानी खतरे के निशान से नौ सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया।
अभी तक जलस्तर बढ़ते हुए गांवों की तरफ रुख कर चुका था मगर रविवार से जलस्तर घटने से बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों की दुश्वारियां कम होती दिखाई दे रही हैं। रविवार को सरयू के आसपास मामूली कटान हुआ। धीरे-धीरे घट रहे जलस्तर से कटान भी कम है। यदि जलस्तर तेजी से घटता है तो कटान तेज होता है।
सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि मैदानी इलाकों में कटान से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। बांध के आसपास कटान रोकने के मजबूत इंतजाम किए जा रहे हैं।
नवाबगंज क्षेत्र में पानी घटने से माझा के लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं, दत्तनगर के बाड़ी व साकीपुर के चहलावा में कटान की भी स्थिरता बनी हुई है। बहाव न होने से कटान नहीं हो रहा है। ब्योंदा माझा में अब भी चारों तरफ पानी भरा हुआ है। दत्तनगर के प्रधान राजाराम का कहना है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि न तो पशुओं का टीकाकरण हुआ है और न ही बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी गई है। उन्होंने लेखपाल सहित राजस्व कर्मियों पर अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
ब्योंदा प्रधान सहित ग्रामीणों में आक्रोश
ब्योंदा ग्राम प्रधान केशवराम यादव का कहना है कि राजस्व कर्मी द्वेष भावना से काम कर रहे हैं। ब्योंदा माझा से जुड़े राजस्व ग्राम पलिया चरौठा के बाढ़ पीड़ितों को राहत किट मिलनी है, लेकिन वितरण 10 किमी दूर घांचा में कराया जा रहा है। लोगों को इतनी दूर किराया-भाड़ा देकर जाना पड़ेगा। पिछले साल राहत किट गांव के स्कूल में बांटी गई थी। प्रधान ने बताया कि गांव में अभी पानी भरा है। नाव की जरूरत है फिर भी सारी नावें वापस करा दी गई हैं। इसको लेकर गांव के गंगाराम, सोनू, दीनानाथ आदि ने भी नाराजगी जताई है। लेखपाल राजकुमार का कहना है कि आरोप निराधार हैं।