करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज तीन सेंटीमीटर दूर है। नदी का डिस्चार्ज भी कम नहीं हो रहा है। इससे माझावासियों की धड़कन तेज हो गई है। यदि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो अगले 48 घंटे में चंदापुर किटौली गांव के तीन मजरे बाढ़ की जद में आ जाएंगे। ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों की तलाश शुरू कर दी है।
सरयू का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पानी अब आबादी वाले इलाकों की तरफ बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ रही है। सरयू नदी का डिस्चार्ज लगातार तीन दिन से ढाई लाख क्यूसेक के आसपास बना हुआ है। शुक्रवार को नदी का डिस्चार्ज 2.42 लाख क्यूसेक के आसपास रहा। ग्राम बहुवन मदार माझा के सामने नदी और बांध के बीच की दूरी समाप्त हो गई है। नदी अब बांध से टकराने लगी है।
ग्राम चंदापुर किटौली के तीन मजरे पानी से घिरते जा रहे हैं। अभी पानी गांव में नहीं पहुंचा है, लेकिन इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो आने वाले 48 घंटे में चंदापुर किटौली के तीन मजरे बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। बाराबंकी के ग्राम बेहटा, पारा, माझा रायपुर में आबादी के समीप पानी पहुंच चुका है। गनीमत यह है कि बाढ़ का पानी पहले मैदानी इलाकों में फैल रहा है। इसके बाद गांवों की तरफ रुख कर रहा है। शुक्रवार तक लगातार डिस्चार्ज बढ़ा होने के चलते जलस्तर कम होने की संभावना नहीं है। अनुमान है कि जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रहेगी।
बाढ़ चौकियां अलर्ट, निगरानी के निर्देश
बांध की संवेदनशीलता के मद्देनजर डीएम प्रियंका निरंजन ने शुक्रवार को पूरे दल-बल के साथ एल्गिन-चरसड़ी बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने बांध के साथ ही स्परों के निर्माण को भी देखा। डीएम ने हर हाल में बांध की मजबूती बरकरार रखने के साथ ही लगातार निगरानी करने तथा जिन गांवों में बाढ़ का पानी भर जाता है, वहां के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के निर्देश दिए। कहा कि बाढ़ से प्रभावित गांवों का सर्वे कराया जाए। यदि फसल और आबादी प्रभावित है तो उन्हें नियमानुसार सुविधा दी जाए। उन्होंने बताया कि नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। आपदा राहत शिविर भी सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर एडीएम आलोक कुमार, एसडीएम यशवंत राव, बाढ़ खंड के एक्सईएन जय सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ से अधिक कटान का भय
विश्नोहरपुर (गोंडा)। माझा क्षेत्र में लोगों को बाढ़ से ज्यादा कटान का भय बना हुआ है। बाढ़ में भले ही पलायन करना पड़े, लेकिन पानी घटने के बाद पुनः अपने स्थान पर लौट सकते हैं। मगर कटान लोगों के खेत व आवास को निगल लेता है। ऐसे में वहां दोबारा गुजारा संभव नहीं है। ढेमवा पुल से पूरब की बजाय उत्तर पश्चिम की तरफ बह रही नदी की धारा दत्तनगर व साकीपुर गांव के लिए अभिशाप बन गई है। महीनों से हो रहे कटान के बाद भी लेखपाल के अलावा कोई राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। ऐसे में लोगों में और भी निराशा है। कटान से प्रभावित राम मनोरथ, राममिलन, बालकराम, रामचंदर, राजपलक, लालबाबू आदि का कहना है कि प्रशासन इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा है।