गोंडा। जिले की पौराणिक मनवर नदी अपने पुराने स्वरूप में लौट कर संवरती दिख रही है। प्राकृतिक सौंदर्य की प्रतीक और महर्षि उद्यालक की तपस्थली तिर्रेमनोरमा से मनवर नदी का उद्गम हुआ था, यह पौराणिक स्थल होने के साथ ही कई यादों को संजोए हुए है। 82 किमी लंबी नदी बीते कई सालों से विलुप्त होती जा रही थी। मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने 40 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरने वाली नदी को पुराने स्वरूप में लाने और इसके सौंदर्य में निखार के लिए मनरेगा से योजना तैयार की। महीने भर में ही 200 मीटर से अधिक दूरी तक नदी पुराने स्वरूप में लौट आई है और आगे बढ़ रही है।
योजना से प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस पर मनवर नदी के जीर्णोद्घार योजना शुरू किया। 22 करोड़ की लागत से करीब 82 किमी लम्बी नदी के जीर्णोद्घार का कार्य कराने के साथ ही नदी के दोनों तरफ करीब 55 हजार पौधे रोपे जाएंगे। मनवर नदी जिले के पांच ब्लाकों इटियाथोक, मुजेहना, पंडरीकृपाल, मनकापुर तथा छपिया ब्लॉक से होते हुए इन ब्लॉकों के 40 ग्राम पंचायतों से 82 किलोमीटर लंबी दूरी तय करने वाली नदी के जीर्णोद्घार काम शुरू है। 6 हजार मनरेगा श्रमिक काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नदी के पुनरुद्धार में लगभग दो हजार प्रवासी श्रमिकों को भी रोजगार दिया गया है। स्थानीय श्रमिकों के साथ ही प्रवासी श्रमिकों ने अपने मेहनत से नदी को पुराने स्वरूप में लाने का काम किया है। करीब दो सौ मीटर तक नदी साफ ही नही हुई है, दोनो तरफ खुदाई करके उसे आगे बढ़ने का रास्ता भी मिल गया है। अब नदी लगातार आगे बढ़ रही है और श्रमिक भी पूरे उत्साह से काम कर रहे हैं।
मनवर नदी के उद्गम स्थल के तट पर उद्वालक ऋषि की है तपोस्थली
प्राकृतिक सौंदर्य की प्रतीक और महर्षि उद्वालक की तपस्थली तिर्रेमनोरमा आस्था के साथ ही जिले के 125 गांवों के लिए जीवनदायिनी है, यहीं से मनवर (मनोरमा) नदी का उद्गम हुआ है। यह नदी तिर्रेमनोरमा से होते हुए मनकापुर से बस्ती बढ़ते-बढ़ते विशाल रूप ले लेती है और सरयू में समाहित हो जाती है। इस ऐतिहासिक स्थल से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। मनवर नदी के तट पर तिर्रेमनोरमा में ऐतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा मेले में लाखों लोग स्नान करते हैं। कहा जाता है कि यहां पूजन-अर्चन से लोगों के मन की मुराद पूरी होती है। तपस्थली पर महार्षि उद्वालक की समाधि स्थल व आश्रम भी है। इसके अलावा सत्य साईं मंदिर बना हुआ है। राम जानकी मंदिर में अनवरत पूजन होता रहता है। 100 वर्ष पहले यहां मंदिर व आश्रम का निर्माण हुआ था, जिसकी अलग ही पहचान है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, पूजन-अर्चन के अलावा खिचड़ी दान और गौ दान की परंपरा है।
आजादी की क्रांति की यादों को भी समेटे हैं गांव
मनवर नदी के किनारे तिर्रेमनोरमा गांव को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी गोंडा के राजा महाराजा देवी बख्श सिंह ने बसाया था। यह स्थल राजपूतों के शौर्य से भी जुड़ा है। शहर से 14 किमी दूरी पर स्थित तिर्रेमनोरमा गांव में मंगलवार को सबसे बड़ा मेला लगता है। यह स्थल 84 कोसी परिक्रमा के दायरे में भी है और यह राजा दशरथ के पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा को जोड़ता है। इससे यहां मनोकामना पूरी होने की किवदंतियां भी हैं। इस तरह कई ऐतिहासिकता को अपने से जोड़े हुए इस स्थल का दर्शन करने के लिए लोग दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं।
मनवर नदी के महत्व को देखते हुए जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई है। लगातार कार्य हो रहा है और 40 गांव के श्रमिक योगदान कर रहे हैं। जल्द ही नदी को और विस्तार मिलेगा। नदी के दोनो तरफ हरियाली के लिए भी कार्य होगा। -शशांक त्रिपाठी, सीडीओ