गोंडा। कोरोना महामारी के दौरान संक्रमण की रफ्तार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से बाजार चौपट हो गया। एक माह तक चले कोरोना कर्फ्यू के बाद बाद बाजार तो खुल गए।
मगर संक्रमण की दहशत के कारण बाजार में ग्राहकों की आमद कम हो रही है। इससे धंधा मंदा हो गया है। सुबह दस बजे से बाजार तो खुल जाता है। मगर दोपहर बाद ही बाजार में ग्राहक नजर आते हैं।
शाम को जब तक बाजार पूरे शबाब पर पहुंचे प्रोटोकाल के तहत फिर दुकानों के शटर गिराने का समय हो जाता है। लिहाजा ग्राहकों को वापस लौटना पड़ता है। इससे कारोबार की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है। व्यापारियों को बाजार खुलने के समय में बदलाव के बाद ही कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है।
कोरोना महामारी के दौर में संक्रमण तो धीरे-धीरे कम होने लगा है। मगर मरने वालों की संख्या कम नहीं हो रही है। संक्रमण में कमी दर्ज होने पर प्रशासन ने बजार खोलने का आदेश तो कर दिया।
सुबह दस बजे से बाजार खुलने लगती है। ग्यारह बजे तक पूरी बाजार खुल जाती है। लेकिन बाजार में ग्राहकों की आमद दोपहर बाद से ही शुरू होती है। शाम पांच बजे के बाद बाजार पूरे शबाब पर आती है, यानि जब ग्राहकों की भीड़ बाजार मेें दिखाई पड़ने लगती है।
उसी समय पुलिस की गाड़ियां हूटर बजाते बाजार में दौड़ने लगती हैं। पुलिसकर्मी दुकानें बंद कराने लगते है। हालांकि प्रशासन ने शाम सात बजे से कोरोना कर्फ्यू का आदेश किया है। मगर पुलिसकर्मी शाम पांच बजे से ही बाजार बंद कराने लगते हैं। जिससे ग्राहक वापस लौटने लगते हैं।
कोरोना महामारी के कारण कपड़ा कारोबार पिछले एक साल से मंदा हो गया है। कोरोना के डर से लोगों ने भीड़-भाड़ से बचने के लिए बाजार का रुख न के बराबर कर दिया। लॉकडाउन से कारोबार चौपट हो गया है। कोराना संक्रमण की रफ्तार कम होने पर बाजार तो खुल गए।
मगर कारोबार पहले की तरह नहीं हो पा रहा है। ग्राहकों की भीड़ अब बाजारों में देखने को नहीं मिल रही है। इससे कारोबार में 60 फीसदी कमी दर्ज की गई है। कोराना की मार झेल रहे कपड़ा कारोबारियों को सहालग से राहत मिली है। जून माह से शुरू हुई सहालग जुलाई तक चलेगी। सहालग से कारोबार में तेजी आने के आसार बढ़े हैं।