पावर कॉर्पोरेशन को बड़गांव बिजली घर की जमीन वापस मिले अभी एक साल भी नहीं बीता कि करनैलगंज में भी करोड़ों रुपये की जमीन के मालिकाना हक को लेकर कुछ लोग और कॉर्पोरेशन आमने-सामने आ गए हैं। बताया जाता है कि 1970 के दशक में राज्य विद्युत परिषद ने करनैलगंज में करीब साढ़े चार हेक्टेयर (56.25 बीघे) भूमि यहां बिजली घर निर्माण को लेकर अधिग्रहीत की थी।
इस पर कुछ लोगों ने अपना मालिकाना हक जताते हुए दावेदारी ठोंक दी है, जिससे आने वाले दिनों में यहां बन रहे 132 केवी बिजली घर के निर्माण में किसी भी वक्त अड़ंगा लग सकता है।
ऐसे में अपनी दावेदारी मजबूत रखने और कीमती बिजली घर के जमीन संबंधी पुराने दस्तावेजों को जुटाने की पहल भी विभाग की ओर से तेज हो गई है।
गौरतलब है कि 1970 के दशक में जिस समय करनैलगंज बिजली घर का निर्माण हुआ, उस समय यह इलाका तरबगंज तहसील के अंतर्गत आता था और राज्य विद्युत परिषद गोरखपुर व फैजाबाद से इस जिले की मॉनिटरिंग होती थी।
गोंडा-लखनऊ मेन रोड पर स्थित करनैलगंज बिजली घर का निर्माण 1969 में राज्य विद्युत परिषद ने किया था। बिजली घर निर्माण के समय यहां अवर अभियंता सहित एसएसओ व लाइनमैन के रहने के लिए आवास बनाए गए। जबकि साढ़े चार हेक्टेयर जमीन की बाउंड्रीवाल न कराकर पूरे परिसर को बारबेट वायर से बैरिकेट कर दिया गया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे बैरिकेटिंग गायब होने लगी और आज स्थिति यह है कि इस जमीन का विवाद मालिकाना हक को लेकर फंस गया है।
गोंडा-लखनऊ मेन रोड पर साढ़े चार हेक्टेयर भूमि में स्थित करनैलगंज बिजली घर की कीमत मौजूदा समय अरबों रुपये है। इस जमीन पर पावर कॉर्पोरेशन का एक बिजली घर 1969 का बना हुआ है तो एक का निर्माण 2014 में हुआ है। जबकि हाल में अखिलेश सरकार ने इसी जमीन पर 132 केवी के एक और बिजली घर निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है, जिसका काम मौजूदा समय यहां चल भी रहा है।
करनैलगंज बिजली घर की जमीन को लेकर ठोंके गए मालिकाना हक से आने वाले दिनों में किसी भी वक्त इस बिजली घर के निर्माण पर अड़ंगा लगने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो करनैलगंज वासियों को इससे एक बड़ा झटका लगेगा। क्योंकि पावर कॉर्पोरेशन की प्लानिंग यहां बनने वाले 132 केवी क्षमता के बिजली घर से ही आसपास के 5 बिजली घरों को जोड़ने की है, ताकि यहां रह रहे लोगों को शहर की तर्ज पर बिजली की आपूर्ति की जा सके।
राज्य विद्युत परिषद के समय करनैलगंज में अधिग्रहीत की गई साढ़े चार हेक्टेयर भूमि के अभिलेख किसके पास हैं, इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो 1969 में गोंडा जिले को दी जाने वाली बिजली की मॉनिटरिंग गोरखपुर व फैजाबाद से की जाती थी, क्योंकि उस वक्त गोंडा न तो डिवीजन था न ही सर्किल। ऐसे में विभागीय अभियंताओं के सामने जमीन के अभिलेख खोजने की चुनौती एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
करनैलगंज में पावर कॉर्पोरेशन की साढ़े चार हेक्टेयर भूमि पर मौजूदा समय 33 केवी के दो बिजली घर बने हुए हैं, जबकि 132 केवी के एक बिजली घर का निर्माण चल रहा है। कुछ लोगों की ओर से जमीन पर मालिकाना हक को लेकर विवाद दायर किया गया है। इसके मद्देनजर एक्सईएन राधेश्याम भाष्कर, एसडीओ व छह पुराने जेई की एक टीम बनाकर मामले को निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। जमीन पूरी तरह से पावर कॉर्पोरेशन की है, जो भी व्यक्ति इस पर अपना दावा ठोंक रहा है, वह गलत है। -हर्ष मुंशी, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पोरेशन