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जिले में डॉक्टरों की कमी

Thu, 06 Aug 2015 11:27 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में स्वास्थ्य विभाग की जितनी सीएचसी-पीएचसी हैं, उससे कहीं ज्यादा पद यहां डॉक्टरों के खाली चल रहे हैं। मानक की अगर बात करें तो साढ़े 34 लाख आबादी की सेहत का ख्याल रखने वाले खुद जिला अस्पताल में ही 10 डॉक्टरों की पोस्ट खाली पड़ी है।
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यहां डॉक्टरों के कुल सृजित पद 31 हैं, जिसके सापेक्ष केवल 21 ही डॉक्टर तैनात हैं, जबकि महिला अस्पताल में 14 के सापेक्ष 8 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। वहीं सीएमओ के अधीन संचालित सीएचसी, पीएचसी व एडिशनल पीएचसी में चिकित्सकों के कुल सृजित पदों की संख्या 157 है।

जिसमें केवल 69 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। यही वजह है कि आए दिन दूरदराज इलाकों के मरीजों को बेवजह अपना समय और पैसा खर्च करके गोंडा आना पड़ता है। क्योंकि ब्लॉक स्तरीय जिले की 16 सीएचसी में कुछेक को छोड़ किसी में भी डॉक्टर दो बजे के बाद नहीं मिलते।
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जबकि पीएची व एडिशनल पीएचसी की हालत तो इतनी गई गुजरी है कि यहां कई-कई दिनों तक ताला ही लगा रहता है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की 16 सीएचसी-पीएचसी के साथ ही 50 नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 322 एएनएम सेंटर संचालित हैं। जिनकी दूरदराज के गांवों में आलीशान बिल्डिंगें तो बनी हैं, लेकिन यहां काम करने वाले न डॉक्टर हैं न ही अन्य चिकित्सीय स्टाफ।

जिले में सीएमओ व सीएमएस के अधीन तैनाती पाए डॉक्टरों की स्थिति-एक नजर में-
इकाई का नाम            पदनाम            स्वीकृत पद    कार्यरत     खाली पद
जिला अस्पपातल (पुरुष)    चिकित्सक        31        21        10
जिला अस्पपातल (पुरुष)    स्टाफ नर्स        27        19        08
जिला महिला (महिला)    चिकित्सक        14        06        08
जिला महिला (महिला)    स्टाफ नर्स        15        13        02
मुख्य चिकित्साधिकारी        लेवल-1,2,3        157        69        88
मुख्य चिकित्साधिकारी        स्टाफ नर्स        42        06        36
मुख्य चिकित्साधिकारी        डेंटल हाईजीनिस्ट    16        11        05
मुख्य चिकित्साधिकारी        स्वास्थ्य कार्यकर्ता    151        16        135
कुल योग            ---            453        161        292
जिले में संविदा आधारित डॉक्टरों की स्थिति-सीएमओ के अधीन
योजना का नाम    डॉक्टर        स्टाफ नर्स    एएनएम
एनआरएचएम        97        71        34
नोट : इसके अतिरिक्त जिले में 32 फार्मासिस्ट भी संविदा पर कार्यरत हैं। जबकि संविदा पर वार्ड बॉय एक भी नहीं है।

एनएचएम में संचालित योजना आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) में 7 महीने पहले 64 डॉक्टरों की इसलिए भर्ती की गई कि इन डाक्टरों के मार्फत स्कूल में पढने वाले बीमार बच्चों का इलाज किया जाएगा। जो बच्चे कुपोषण या फिर अन्य किसी बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती कर मुफ्त उपचार मुहैया कराया जाएगा। लेकिन सात महीनों से भर्ती पर लगी रोक और जांच के चलते योजना का कोई काम धरातल पर नहीं हुआ।

एनआरएचएम में संविदा के तहत बीते साल आरबीएसके योजना में 64 डॉक्टरों की नियुक्ति हुई थी। जबकि आयुष के तौर पर 22 पुरुष व 11 महिला डॉक्टर पहले से कार्यरत हैं। इन डॉक्टरों से सीएचसी-पीएचसी में सेवाएं ली जा रही हैं। संविदा आधारित डॉक्टर का कोई पद जिले में खाली नहीं है।

सब पर डाक्टर पोस्ट हैं। स्वास्थ्य विभाग में स्थाई डॉक्टरों की कई पोस्ट खाली है। जिसके लिए निदेशालय को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले डाक्टरों के लिए छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही अगर कोई डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का जाएगी।
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-डॉ. अमर सिंह कुशवाहा, सीएमओ गोंडा
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