गोंडा। शहर के गुरुनानक चौराहा स्थित राजकीय पुस्तकालय में शनिवार को आयोजित अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं, कॅरिअर निर्माण, पेपर लीक और फेक न्यूज जैसे समसामयिक मुद्दों पर युवाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। संवाद के दौरान युवाओं ने मांग उठाई कि पेपर लीक को राष्ट्रीय अपराध घोषित कर दोषियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में कोई युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
कार्यक्रम में महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. देवेंद्र सिंह, चिकित्साधिकारी डॉ. विकास वर्मा, पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुरेश कुमार सिंह, गणित प्रवक्ता ऋषि शुक्ल और वरिष्ठ शिक्षक डॉ. अशोक पांडेय मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि आज युवाओं के सामने प्रतियोगिता और तकनीकी बदलावों के रूप में कई चुनौतियां हैं लेकिन निरंतर मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों से सकारात्मक सोच बनाए रखने और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बब्बन कुमार सिंह, बबली सिंह, उत्तम मिश्र, नेहा वर्मा, रामू गुप्ता, प्रेम शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग
- प्रतियोगी छात्र अजय वर्मा ने कहा कि कई परीक्षाओं के परिणाम केवल पास-फेल के रूप में जारी किए जाते हैं, जिससे अभ्यर्थियों को अपनी वास्तविक स्थिति और तैयारी का आकलन नहीं हो पाता। इस पर सीएमएस डॉ. देवेंद्र सिंह ने कहा कि परीक्षा एजेंसियों को अंक सार्वजनिक करने चाहिए ताकि छात्र अपनी कमियों को समझकर बेहतर तैयारी कर सकें। उन्होंने छात्रों को नियमित मॉक टेस्ट देने की सलाह भी दी।
- छात्रा नेहा वर्मा ने कहा कि लंबे समय तक मेहनत करने के बाद यदि पेपर लीक हो जाए तो छात्रों का आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। इस पर प्रधानाचार्य सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि पेपर लीक राष्ट्रीय स्तर का गंभीर अपराध है। इसमें शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे निराश न हों और लगातार मेहनत जारी रखें, क्योंकि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
- एआई और सोशल मीडिया के दौर में फेक न्यूज को लेकर छात्र अभिजीत यश भारती ने सवाल उठाया। गणित प्रवक्ता ऋषि शुक्ल ने कहा कि गलत सूचनाओं से बचने के लिए छात्रों को विश्वसनीय समाचार पत्र और प्रमाणिक स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए। किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
- छात्रा रश्मि ने सवाल किया कि जब छात्र अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन करते हैं तो उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी आवाज जिम्मेदारों तक कैसे पहुंचे। इस पर चिकित्साधिकारी डॉ. विकास वर्मा ने कहा कि जिम्मेदार मीडिया संस्थानों को युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही गतिविधियों पर भी निगरानी जरूरी है ताकि सही मुद्दे सही मंच तक पहुंच सकें।