घाघरा व सरयू नदी का जलस्तर रुक-रुक कर बढ़ रहा है। घाघरा के पानी से हर साल प्रभावित होने वाले मांझा रायपुर व परसावल गांव में नदी का पानी बहना शुरू हो गया है। बाढ़ से जूनियर हाईस्कूल भी घाघरा में समा गया।
बाढ़ प्रभावित करनैलगंज व नवाबगंज में अब तक करीब छह सौ एकड़ से अधिक जमीन को घाघरा व सरयू अपनी आगोश में ले चुकी है। मांझा रायपुर व परसावल गांव की दो हजार आबादी गांव छोड़कर बंधे पर आ गई है।
जुलाई की शुरुआत में आए मानसून और पहाड़ों पर होने वाली बारिश का असर जिले में भी दिखना शुरू हो गया है। हफ्ते भर पहले जहां घाघरा नदी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही थी, तो वहीं अब एल्गिन-चरसड़ी ब्रिज पर इसका जलस्तर खतरे के निशान 106.07 मीटर के सापेक्ष 105.89 मीटर तक पहुंच गया है।
दूसरी ओर अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान 92.73 के सापेक्ष 91.98 मीटर पर बह रही है। घाघरा के बढ़ते जलस्तर से करनैलगंज इलाके में बंधे के इस पार पड़ने वाले दो गांव मांझा रायपुर व परसावल में नदी का पानी घुस गया है। यहां रहने वाली दो हजार आबादी को मजबूरन भागकर बंधे पर शरण लेनी पड़ी।
ग्राम परसावल में स्थित एक परिषदीय जूनियर हाई स्कूल मंगलवार शाम से बुधवार तक कटान की जद में आ गया। भवन घाघरा में समा गया। अब वहां नदी की तेज धारा बह रही है। बुधवार को ग्राम पारा और बेहटा में घाघरा की कटान तेज हो गई। नदी कटान करते हुए बांध की ओर आ रही है।
नदी की तेज कटान से बांध के डेंजर जोन में खतरा भले ही कम हो मगर ग्राम नैपुरा, पारा, बेहटा के सामने कटान की स्थिति को देखते हुए बांध को खतरा पैदा हो सकता है। नवाबगंज इलाके में भी जैतपुर माझा, मांझाराठ, दुर्गागंज माझा इलाके में नदी की कटान जारी है।