करनैलगंज। तेज धूप और तपती सड़क के बावजूद कांवड़ियों के हौसले कम नहीं हुए। न कोई थकान, न मौसम की परवाह और न मंजिल की दूरी का डर दिखा। कंधे पर कांवड़ और जुबां पर सिर्फ बोलबम के जयघोष रहे। रविवार को जिले की सड़कें शिवभक्ति के ऐसे सैलाब की गवाह बनीं, जिसमें दूर-दूर तक सिर्फ भगवा ही नजर आया।
करनैलगंज के कटरा घाट से लेकर दुखहरणनाथ और पृथ्वीनाथ मंदिर तक पूरा इलाका हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा। सरयू में जल भरने के लिए शनिवार रात से शुरू हुआ कांवड़ियों का रेला रविवार को ऐसा बढ़ा कि घाट से लेकर सड़कों तक सर्वत्र भगवा ही दिखाई दे रहा था। एक अनुमान के मुताबिक, इस बार 16 लाख से अधिक कांवड़ियों ने सरयू नदी से जल भरा है।
कटरा घाट पर रविवार सुबह होते-होते आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आसपास के जिलों से पहुंचे कांवड़ियों के जत्थे लगातार घाट पर पहुंचते रहे। स्नान और पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने सरयू से जल भरा और कंधे पर कांवड़ रखकर पैदल अपनी मंजिल की ओर बढ़ चले। घाट से मुख्य मार्गों तक हर कदम पर बोलबम और ‘बाबा नगरिया दूर है, जाना बहुत जरूर है’ के जयकारे सुनाई देते रहे। रात-दिन चल रही कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी पूरे उत्साह से शामिल रहे। कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शनिवार रात से ही गोंडा-लखनऊ राजमार्ग पर रूट डायवर्ट कर दिया था। फोरलेन पर जगह-जगह बैरियर लगाकर वाहनों की आवाजाही रोकी गई। रविवार को सरयू पुल के आसपास आम वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। पसका संवाद के अनुसार, कजरी तीज पर शिव के जलाभिषेक के लिए रविवार को भौरीगंज स्थित श्रीरामजानकी सरयू घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। प्योली के पूरे बिलंद निवासी सोनू ने बताया कि वह 2009 से लगातार कांवड़ लेकर जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए घाट पर बैरिकेडिंग और गोताखोर तैनात रहे। पसका त्रिमुहानी घाट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद
करनैलगंज में सरयू नदी से जल लेने के लिए उमड़े कांवड़िये। संवाद