धानेपुर के कल्याण नगर में लाठी-डंडा लेकर मुस्तैद लोग। - संवाद
मुजेहना। नगर पंचायत धानेपुर के कल्याण नगर वार्ड में शनिवार सुबह खेलती-कूदती जिंदगी की चहक कुछ ही पलों में सिसकियों में बदल गई। चार मासूम रोज की तरह घर से शौच के लिए निकले थे, लेकिन तीन ही लौट पाए। पांच वर्षीय मुस्कान को उसकी बड़ी बहन और दो अन्य बच्चों के सामने ही कुत्तों ने नोंच डाला।
छह वर्षीय महक अभी भी सहमी हुई है। उसकी आंखें सूजी हुई हैं और शब्द टूट-टूटकर निकलते हैं। वह बोली- कुत्ते दौड़े… मुस्कान गिर गई… हम चिल्लाए…” इसके आगे वह कुछ नहीं बोल पाती। पास खड़े नैतिक और सुनैना भी खामोश हैं। उनकी आंखों में वह मंजर अब भी ताजा है।
मां बार-बार बेहोश हुई जा रही हैं। घर के आंगन में पसरा सन्नाटा चीखों में बदल जाता है, जब वह बेटी का नाम लेकर पुकारती हैं। परिवार के लोग बताते हैं कि मुस्कान को गुड़ियों से खेलना पसंद था। वह बहन के साथ स्कूल जाने की जिद करती थी। अब घर के कोने में पड़ी उसकी चप्पलें और छोटी सी फ्रॉक परिजनों के दिल को चीर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वह घर से महज 150 मीटर दूर है। घटना के बाद से मोहल्ले में दहशत है। कई लोग बच्चों को अकेले बाहर नहीं जाने दे रहे। कुछ ग्रामीण लाठी-डंडा लेकर निगरानी कर रहे हैं, ताकि फिर कोई मुस्कान यूं न छिन जाए।
ऐसी घटनाओं से बढ़ी चिंता
जनवरी माह में ही मेडिकल कॉलेज में 4,200 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगाई गई। शनिवार को दोपहर तक 73 लोग टीका लगवाने पहुंचे थे। आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल एक वार्ड या गांव तक सीमित नहीं है। शहर के अंबेडकर चौराहे से लेकर पुलिस लाइन मार्ग, आवास विकास कॉलोनी और ग्रामीण इलाकों तक कुत्तों का डर बना हुआ है। माधोपुर और कटरा बाजार क्षेत्र में भी एक ही गांव में करीब 15 लोगों को कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कुत्ता काटने पर ये करें
डॉ. विवेक मिश्र का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना जीवन बचा सकता है। घाव को 10-15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं। एंटीसेप्टिक लगाएं। बिना डॉक्टर की सलाह के टांके न लगवाएं। तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं। झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं।