गोंडा। जिले के महिला थाने में संचालित परिवार परामर्श केंद्र इन दिनों अव्यवस्थाओं और बाहरी हस्तक्षेप की वजह से जूझ रहा है। यहां न तो परामर्शदाताओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही फरियादियों के बैठने की समुचित व्यवस्था। इससे न केवल सुनवाई प्रक्रिया बाधित हो रही है। बल्कि मामलों के समाधान में भी कठिनाई आ रही है।
रविवार को आयोजित परामर्श सत्र में कुल 68 मामलों की सुनवाई की गई। जिनमें से पांच मामलों में आपसी सुलह कराई गई और पांच पत्रावलियों को बंद किया गया। खास बात यह रही कि इटियाथोक से आए एक दंपति ने परामर्शदाताओं की समझाइश के बाद आपसी गिले-शिकवे भुलाकर साथ रहने का फैसला किया। हालांकि युवक के साथ आए एक अन्य व्यक्ति ने सुलह में बाधा डालने की कोशिश की, जिससे परामर्शदाताओं के साथ उसकी नोंकझोंक हो गई। इस दौरान परामर्शदाताओं को परिवार परामर्श केंद्र के नियमों की जानकारी देकर स्थिति को संभालना पड़ा।
बाहरी हस्तक्षेप से मामले बिगड़ रहे
परामर्शदाताओं का कहना है कि कई मामलों में बाहरी लोगों द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे सुलह की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके बावजूद, व्यवस्था सुधारने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।इंस्पेक्टर अनीता यादव के हस्तक्षेप से रविवार का मामला किसी तरह सुलझाया गया। परामर्शदाता गंगाधर शुक्ल, यशोदानंदन त्रिपाठी, संतोष ओझा, अनीता श्रीवास्तव, राजमंगल मौर्य और शशि भारती का कहना है कि वे लगातार मामले सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हर बार बाहरी दखल बाधा बनता है।