शहर के एक लॉन में आयोजित हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम में मौजूद शिक्षक। -संवाद
गोंडा। नई शिक्षा नीति के तहत पांच से छह साल तक के बच्चों में गतिविधि आधारित भाषा व अंकीय दक्षता बढ़ाई जाए। हमारा लक्ष्य सिर्फ बच्चे की शैक्षणिक गुणवत्ता होनी चाहिए। प्री प्राइमरी शिक्षा की भूमिका काफी अहम होती है। इसके बाद बच्चे को पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ता है। ये बातें सोमवार को झंझरी ब्लॉक क्षेत्र में आयोजित जिला स्तरीय हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम में एसआरजी विनीता कुशवाहा ने कहीं।
उन्होंने कहा, नई शिक्षा नीति के तहत मुख्य सहायिका व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्री प्राइमरी शिक्षा में अहम भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्र ने किया। डीपीओ मनोज कुमार मौर्य ने कहा कि बेसिक और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग आपसी समन्वय से काम करेगा। इस दौरान जिलेभर के नोडल शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे।
निपुण बच्चों को किया गया पुरस्कृत
जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) हरिगोविंद यादव ने बताया कि जिले में कुल 3,095 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 2,550 केंद्र परिषदीय विद्यालयों में संचालित हैं। इसमें से 1,580 विद्यालयों की भारत सरकार की ओर से प्री प्राइमरी की शिक्षा मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रत्येक ब्लॉक से बेहतर काम करने वाली मुख्य सेविका, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व नोडल शिक्षक के साथ ही दो-दो निपुण बच्चों को पुरस्कृत किया गया। बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए टीएलएम सामग्री तैयार की गई। शिक्षकों ने बताया कि इसके माध्यम से छोटे बच्चों में सीखने की अभिरुचि बढ़ती है।