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जेम पोर्टल से टेंडर कर 1.44 करोड़ की बचत

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गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग सरकारी बजट में बचत करके सरकारी कोष बढ़ा रहा है। दबावमुक्त होकर जेम पोर्टल से टेंडर कराकर बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने पहली बार एक करोड़ 44 लाख 28 हजार रुपये की बचत की है।
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अभी तक मनमाने ढंग से स्वेटर का टेंडर होने से बचत नहीं हो पाती थी। सरकार की ओर से एक बच्चे को स्वेटर देने के लिए 200 रूपये तय किया गया था। 3.37 लाख बच्चों के लिए 7 करोड़ के करीब का बजट जारी हुआ। लेकिन बीएसए ने जेम पोर्टल से पूरी प्रतिस्पर्धा का मौका सभी फर्मों को दिया, जिससे 200 रुपये के बजाए 158 रुपये में ही स्वेटर आपूर्ति का अनुबंध फर्म से हुआ।
योजना में बचत करने से जिले की साख बढ़ी है और शैक्षिक विकास के लिए जिले को नवीन व तकनीकी योजनाओं में प्राथमिकता मिलेगी।
स्वेटर वितरण के लिए हुए टेंडर में प्रति स्वेटर 42 रूपए की बचत की गई। इससे एक करोड़ 44 लाख 28 हजार रूपए कम सरकार का इस योजना पर खर्च होगा।
अभी तक कई सरकारी परियोजनाओं में तय बजट से अधिक ही खर्च होता रहा है। सरकार की ओर से तय बजट की सीमा में ही खर्च किए जाने पर जोर दिया जाता है फिर कई विभाग ऐसे हैं जहां सुधार नही है।
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यह अलग बात है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने तय बजट छोडिए उससे भी कम में योजना संचालित करने का रेकार्ड बनाया है। जिलाधिकारी डा. नितिन बसंल व सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने इसके लिए बीएसए व उनकी टीम को सराहा। सीडीओ का कहना है कि बीएसए की सूझबूझ से ऐसा संभव हुआ है।
वहीं बचत होने से बजट को बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किए जाने के लिए तीन साल की योजनाओं में कई परियोजनाएं तैयार हो रही हैं। बीएसए का कहना है कि उनका पूरा प्रयास रहा कि तय बजट से कम मूल्य पर अच्छी गुणवत्ता का स्वेटर बच्चों को मिले और बजट की बचत से बच्चों के लिए और योजनाएं संचालित की जाएं।
बिना बजट के ही कई स्कूलों में हो रहें नई पहल
बेसिक शिक्षा विभाग में एक तो तय बजट में बचत करके रेकार्ड बनाया ही है, इसके साथ ही कई स्कूलों में बिना बजट के ही कई नई पहल हो रही है।
बाबा मेठिया जूनियर हाईस्कूल में विज्ञान शिक्षा के लिए क्लबों का गठन और क्राफ्ट कला सीखाने का कार्य बिना बजट के ही हो रहा है। इसके अलावा वहां पर बेटियों को रोजगार परक शिक्षा दी जा रही है। प्राइमरी स्कूल हरिहरपुर में बिना सरकारी बजट के ही साइंस लैब व पार्क तैयार किया गया है।
जूनियर हाईस्कूल दलीपपुरवा में कई कार्य किए जा रहे हैं, वहां पर विज्ञान सेंटर तक स्थापित किया गया है। वहीं प्राइमरी स्कूल बकौलीपुरवा में कम्युनिटी लर्निंग और हमने सीखा मुहिम बिना बजट के ही संचालित हो रहा है। हमने सीखा मुहिम जिले के 200 स्कूलों में चल रहा है, वहीं जूनियर हाईस्कूल कटरा बाजार में भी बालिका शिक्षा के कार्य हो रहे हैं। इस तरह कई स्कूलों में पहल हो रही है।
बचत करने वाले जिलों को मिलेगी विशेष सहायता
सरकार के बजट में बचत करने वाले जिलों को सर्व शिक्षा अभियान से विशेष सहायता भी दिए जाने की तैयारी हो रही है।
इसमें शिक्षकों शैक्षिक विकास के लिए विशेष परियोजनाओं से जोड़ने के साथ ही बच्चों के शैक्षिक विकास के लिए नवीन योजनाओं में प्राथमिकता होगी। इसमें जिला भी शामिल हो गया है। बचत करके जिले के स्कूलों ने अपना स्थान बना लिया है।
स्वेटर वितरण के बजट में जिले ने बेहतर कार्य किया है और बचत भी किया है। वहीं पूरे मंडल के जिलों ने बचत किया है। शैक्षिक विकास के सपोर्ट के लिए इन जिलों को नवीन तकनीकी सहायताओं से जोड़ा जाएगा।
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- विनय मोहन वन, सहायक शिक्षा निदेशक
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