गोंडा। पोर्टरगंज पथवलिया में हुई घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही से हुई एक मौत है। एक ऐसी मौत, जिसे रोका जा सकता था। रंजीत तिवारी की जान किसी अचानक टूटे तार ने नहीं बल्कि सिस्टम में उलझी उन फाइलों ने ली, जो सालों तक दफ्तरों में धूल खाती रहीं। विभागीय अफसर भी खतरे को जानते-बूझते अपनी आंखें मूंद रहें। घटना के बाद इलाके के लोगों में गुस्सा साफ दिख रहा है। लोग इसे सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का परिणाम मान रहे हैं। हालांकि जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अब जनता को सिर्फ जांच नहीं, बल्कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई चाहिए।
पथवलिया में कंपोजिट विद्यालय और घरों के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन लंबे समय से खतरे का कारण बनी थी। ग्रामीणों ने कई बार इसे दुरुस्त बनाने के लिए शिकायत भी दर्ज कराई। स्कूल प्रशासन ने इसके लिए कई बार पत्राचार भी किया। बीते जनवरी माह में यह मामला आयुक्त तक भी पहुंचा था। इसके बावजूद हालात जस के तस बने रहे। फाइलें आगे बढ़ती रहीं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे जब लाइन में स्पार्किंग शुरू हुई तो रंजीत तिवारी ने खतरे को भांप लिया। वह लोगों को सुरक्षित करने के लिए घर से बाहर निकले, लेकिन कुछ ही पलों में वही खतरा उनके लिए काल बन गया। जलता हुआ हाईटेंशन तार टूटकर सीधे उनके ऊपर आ गिरा और तेज करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर ही उनकी झुलसकर मौत हो गई।
सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब लाइन बदलने के लिए बजट स्वीकृत था, तो काम क्यों नहीं हुआ। आयुक्त के आदेश के बावजूद कार्रवाई किस स्तर पर रोकी गई। क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने इस खतरे को नजरअंदाज किया या फिर इस काम को जानबूझकर टालते रहे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह हाईटेंशन लाइन सीधे स्कूल भवन और घरों की छतों के ऊपर से गुजर रही थी। जहां रोज बच्चे पढ़ते हैं। रंजीत की असमय हुई मौत ने एक परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। परिवार के छोटे बच्चे के सिर से पिता का हाथ उठ गया। महज डेढ़ साल का मासूम सूनी आंखों से अपने पिता को ढूंढ रहा है।