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बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर

Sun, 09 Aug 2015 11:11 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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पांडवों द्वारा स्थापित प्राचीनकाल का विशालकाय बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर में सावन में हजारों श्रद्धालु बेलपत्री, भांग, धतूरा, पुष्प, दुग्ध से पूजन-अर्चन कर मनवांछित फल की कामना करते हैं। गोंडा से 35 और खरगूपुर से तीन किलोमीटर दूर पश्चिम में पृथ्वीनाथ मंदिर स्थित है।
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माना जाता है कि इस भू-भाग में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अलग-अलग स्थानों पर पांच भव्य शिवलिंगों की स्थापना की थी। इसमें सबसे प्रमुख पृथ्वीनाथ में भीम, पचरननाथ में अर्जुन तथा इमरती (विशेश्वरगंज बहराइच) में एक ही गर्भगृह में नकुल व सहदेव ने शिवलिंग की स्थापना की थी।

उक्त विशालकाय शिवलिंग गुप्तकाल के बताए जाते हैं। इन सभी में पृथ्वीनाथ स्थित मंदिर में स्थापित 6 फुट ऊंचा शिवलिंग काले कसौटी के दुर्लभ पत्थरों से बना है। पूर्वजों द्वारा बताया जाता है कि शिवलिंग की पूजा करने से समस्त देवों की पूजा हो जाती है।
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क्योंकि यह विशालकाय शिवलाट जिस गृह में स्थित है, वह चक्राकार है तथा ब्रह्मांड का आकार भी चक्राकार है। चूंकि ब्रह्मांड में समस्त देवी-देवताओं का वास होता है, इसीलिए 21वीं शताब्दी में शिवलिंग की पूजा करने से समस्त देवों की पूजा हो जाती है।

सावन का पूरा माह ही देवों के देव महादेव का है। क्योंकि हर शिवालय और ज्योतिर्लिंग में शिव साक्षात विद्यमान रहते हैं। सच्चे मन से यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को शिव के साक्षात दर्शन व उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। माना जाता हैं कि समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक हलाहल (विष) था, जिसे शिव ने लोक कल्याण के लिए पी लिया। इसीलिए उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है। सावन में यहां हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं।
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