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एक साल में टीबी के बढ़ गये 520 मरीज

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गोंडा। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार की ओर से क्षय रोग के उन्मूलन के लिए बीते कई वर्षों से अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जिले के सभी ब्लाकों के कोने-कोने में दवाओं के वितरण के लिए डाट्स केंद्र बनाये गये हैं। इसके बावजूद बीते एक साल में क्षय रोग के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। साल 2018 के मुकाबले 2019 में कुल 520 मरीज बढ़ गये हैं। विभाग की ओर से इसके लिए अलग से एक सेल बनाई गई है। जिसकी मानीटरिंग और संचालन के लिए जिला स्तर का एक अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
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राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आगामी 16 मार्च से 28 मार्च तक अभियान चलाया जायेगा। जिसमें जिले के लगभग 4 लाख लोगों को कवर किया जायेगा। जितने भी मरीजों में ट्यूबरकुलोसिस यानि टीबी के मरीज पाये जाते हैं उनमें से 81 फीसदी लोगों को निश्चय पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है। खास बात ये है कि निश्चय पोर्टल पर पंजीकृत मरीजों को पांच सौ रुपये प्रति महीने की दर से भुगतान भी मरीजों को उनके खाते में सरकार की ओर से किया जाता है जिससे वो अपने शरीर को पोषण दे सकें। ये पैसा मरीजों को सीधे खाते में ही भुगतान किया जाता है। विभाग की ओर से लगातार अभियान चलने के बाद भी इस साल मरीज बढ़े हैं। साल 2018 में जिले में कुल मरीज 5161 थे, वहीं अब 2019 में ये आंकड़ा बढ़कर 5681 हो गया है। जिले में कुल 31 बलगम जांच केंद्रों की स्थापना की गई है। इनमें 29 जांच केंद्र ब्लॉकों में व 02 केंद्र शहर में स्थित हैं। यहां पर संदिग्ध लोगों में टीबी की जांच की जाती है।
जांच की व्यवस्था
जिले में डाट्स केंद्र 476
बलगम जांच केंद्र 31
टीबी यूनिट 15
जिले में कुल टीमें 150
कुल सुपरवाइजर 50
तीन ब्लॉकों में सबसे अधिक संवेदनशील
अभी तक जिले में जो भी मरीज टीबी के मिले हैं उनके आंकड़ों पर गौर करें तो तीन ब्लॉकों सबसे अधिक संवेदनशील चिह्नित किया गया है। करनैलगंज, परसपुर और वजीरगंज ब्लाक में सबसे अधिक टीबी के मरीज पाये गये हैं। खास बात ये है कि टीबी के मरीजों की एचआईवी और शुगर की जांच भी फ्री में की जाती है।
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अब निजी अस्पताल भी देंगे आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षय रोग का पूर्ण रूप से उन्मूलन की दिशा में तेजी से प्रयास हो रहा है। बताया जा रहा है कि अभी तक कुछ मरीज जो कि निजी अस्पतालों में अपना इलाज कराते थे उनका आंकड़ा विभाग को नहीं मिलता था। लेकिन अब सभी निजी अस्पताल भी क्षय रोग के मरीजों की डाटा विभाग को मुहैया करायेंगे। इससे उनकी मॉनिटरिंग विभाग की टीम करेगी।
क्षय रोगों की जांच की प्रक्रिया पहले से एडवांस हुई है इसलिए जो मरीज बलगम की जांच में छूट जाते थे वो भी पकड़ में आ जाते हैं। अब बलगम की जांच से आगे भी सीबी नाट टेस्ट को अपनाया जाता है। अब इस जांच प्रक्रिया में कोई भी मरीज छूट नहीं सकता है। सभी मरीजों की पूरी मॉनीटरिंग की जाती है।
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-डॉ. एके उपाध्याय, प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी
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