गोंडा। 47 साल पुराने रामशंकर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए दो दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने राम नरायन और राम उग्गर की आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग खारिज करते हुए दोनों को छह सप्ताह के भीतर सीजेएम न्यायालय, गोंडा में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। 31 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश की प्रति मंगलवार को सामने आई।
देहात कोतवाली क्षेत्र के महादेवा गांव में आठ मार्च 1979 को रामशंकर की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के अनुसार, राजेंद्र प्रसाद ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया गया कि पुरानी रंजिश के चलते राम नरायन समेत अन्य आरोपियों ने सालपुर गांव के पास राजेंद्र प्रसाद और रामशंकर पर हमला कर दिया। इसमें रामशंकर की मौत हो गई।
मामले की सुनवाई के बाद 18 जून 1982 को अपर सत्र न्यायाधीश ने राम नरायन, रामफेर, ज्ञानेंद्री और राम उग्गर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इन लोगों ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ राहत की मांग की। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 13 फरवरी 2026 को सजा बरकरार रखते हुए सभी दोषियों को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ज्ञानेंद्री और रामफेर की मृत्यु हो गई। वहीं, राम नरायन और राम उग्गर ने आत्मसमर्पण से छूट के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी मांग स्वीकार नहीं की और छह सप्ताह में निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया।