गोंडा। कोयले की कमी से पैदा हुई बिजली की समस्या के कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। कुंदुरखी और उतरौला चीनी मिलों ने जिले को बिजली देना बंद कर दिया, तो वहीं पड़ोसी जिला बस्ती ने खुद ओवरलोड की बात कहकर बिजली देने से हाथ खड़ा कर दिया। खपत की अपेक्षा बिजली आपूर्ति काफी कम हो रही है। पूरे अक्टूबर तक चार लाख उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
जिले में बिजली का संकट और गहरा गया है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सिर्फ आठ से दस घंटे बिजली मिल रही है। जिले में सोहावल से बिजली आपूर्ति होती थी जिससे पूरे मंडल को बिजली दी जाती थी।
पिछले दिनों ऐली परसौली के पास घाघरा नदी के कटान में 220 केवी लाइन के दो पोल आने से बिजली का संकट शुुरू हो गया। जिले को सोहावल से 228 मेगावाट, उतरौला चीनी मिल से 40 मेगावाट तथा कुदंरखी चीनी मिल से 80 मेगावाट बिजली मिल रही थी, जबकि यहां करीब 500 मेगावाट बिजली की खपत है। इसी बीच कोयले की कमी की बात कहकर कुदंरखी व उतरौला चीनी मिलों ने बिजली देना बंद कर दिया।
इससे बिजली की किल्लत बढ़ गई। आपातकालीन रोस्टिंग के नाम पर रात में घंटों बिजली गुल रहती है। आपातकालीन रोस्टिंग का कोई समय तय नहीं है कि कितने समय आपूर्ति बंद की जाएगी। कंट्रोल रूम से आदेश आते बिजली बंद कर दी जाती है। कटौती की जद में आने वाले उपकेंद्र को 24 घंटे में आठ से दस घंटे तक ही बिजली मिलती है। ज्यादातर कटौती रातों में होती है, जिससे लोगों को सुकून की नींद भी नहीं आती है।
जेल रोड स्थित पारेषण खंड के उपकेंद्र से बिजली वितरण किया जाता है, जहां 500 के सापेक्ष 228 मेगावाट बिजली मिल रही है। 220 केवी विद्युत उपकेंद्र सोहावल से 228 मेगावाट व स्वतंत्र बिजली आपूर्तिकर्ता कुंदुरखी चीनी मिल से 80 मेगावाट बिजली तथा उतरौला से 40 मेगावाट बिजली खरीदकर पूरा किया जाता है।
कोयले की कमी के चलते इन दोनों चीनी मिलों ने बिजली देना बंद कर दिया। सिर्फ 228 मेगावाट बिजली के सहारे जिले समेत मंडल को विद्युत आपूर्ति की जाती है। गोंडा से मंडल के अन्य जिले बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती को बिजली दी जाती है। पारेषण खंड एक्सईन रणवीर सिंह ने कहा कि अगले महीने तक बिजली आपूर्ति सामान्य होने की संभावना है। चीनी मिलों का पेराई सत्र शुुरू होने से बिजली आपूर्ति सुधार होगा।