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चीनी मिलों ने नहीं किया भुगतान

Tue, 21 Jul 2015 10:15 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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न्यायालय का आदेश हो या फिर शासन-प्रशासन का, यहां सारे आदेश चीनी मिलों के आगे बौने साबित हो रहे हैं। जिस उपज को बेच कर किसान गन्ने की तरह अपने जीवन में मिठास लाने की कोशिश करते हैं, उन्हें उसी गन्ने की मिठास से कड़वाहट एवं दर्द मिलता है। खासकर देवीपाटन मंडल में दो लाख किसानों का चीनी मिलों ने करीब चार अरब रुपये दबा रखा है और मिल बंद हुए करीब तीन माह बीत गए।
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किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर चीनी मिलों ने हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया है। मंडल की 10 चीनी मिलें किसानों के गन्ना मूल्य का तीन अरब 95 करोड़ 92 लाख रुपये अभी तक दबाए बैठी हैं। चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान में न सिर्फ नियमों को ताक पर रखा, बल्कि अधिकारियों के निर्देशों का भी पालन नहीं किया।

चीनी मिल बंद होने के तीन माह बाद भी किसान अपने पैसे के लिए तरस रहे हैं। हद तो तब हो गई, जब चीनी मिलों ने किसानों के बकाए का 75 प्रतिशत भुगतान किये जाने के हाईकोर्ट के 15 जुलाई की डेट लाइन को भी नकार दिया। इसको लेकर चीनी मिलों के रवैये पर भी अब कई तरह के सवाल खड़े किये जा रहे हैं। वहीं मिलों की इस मनमानी पर किसानों का भी दर्द व आक्रोश उभर कर सामने आने लगा है।
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किसानों व सरकार के मध्य तय मामलों के तहत चीनी मिलों को गन्ना मूल्य को भुगतान समय से करना था, जिसमें कटौती किये जा रहे 40 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान चीनी मिलों की पेराई बंद हो जाने के बाद करना था। इसी शर्त पर किसानों ने मिलों को गन्ने की आपूर्ति की थी। लेकिन चीनी मिलों ने पांच माह बाद तक किसानों के बकाएदारी का भुगतान नहीं किया।

अभी भी किसानों का करीब 25 फीसदी धन फंसा हुआ है, जिसको लेकर किसान परेशान हैं। किसान पैसे के अभाव में अपनी दूसरे फसलों की तैयारी भी नहीं कर पा रहे हैं। यह हाल तब है, जब विभागीय व जिला प्रशासन की ओर से मिल के प्रबंधतंत्र को नोटिस व बैठकों में कार्रवाई करने के लिए चेताया जाता है।

कई मिलों के अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं लेकिन किसी भी मिल अधिकारी की गिरफ्तारी व कुर्की जैसी कार्रवाई नही की गई है। बड़े लोगों पर पुलिस कार्रवाई करने से कतरा रही है।

गन्ना खरीद विनियमन अधिनियम के तहत किसानों से गन्ना खरीद होने के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया जाना चाहिए। ऐसा न होने की दशा में किसानों के बकाए धन पर ब्याज की भी देनदारी बनती है। यह बात और है कि चीनी मिलें अपने रसूख के दम पर किसानों को कभी भी ब्याज का भुगतान नहीं करती हैं।

मंडल की सभी 10 चीनी मिलों पर कुल तीन अरब 95 करोड़ 92 लाख 64 हजार की बकाएदारी है। इसमें से मनकापुर चीनी मिल पर 32.90 करोड़ रुपये, मैजापुर पर 12.76 करोड़, बजाज पर 1.1 अरब, जरवलरोड पर 81 लाख रुपये, चिलवरिया पर 73.33 करोड़, परसंडी पर पांच लाख रुपये, तुलसीपुर पर 34.32 करोड़, बलरामपुर पर 47.93 करोड़, ईटईमैदा पर 74.42 करोड़ व नानपारा सहकारी चीनी मिल पर 17.61 करोड़ रुपये से अधिक की बकाएदारी है।

गन्ना मूल्य का पांच माह बाद भी भुगतान न मिलने से किसानों के विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि मुख्य आय तो गन्ने का ही पैैैसा है। जब गन्ने का पैसा फंस गया तो न सिर्फ किसानों के कई जरूरी काम रुके, बल्कि दूूसरी फसलों की खेती का भी बजट गड़बड़ा गया। ग्राम भदुआ तरहर के किसान श्रीशयाम अवस्थी ने बताया कि गन्ना मूल्य न मिल पाने का असर दूसरी फसलों की खेती पर पड़ा है। किसान समय से खाद-बीज नही ले पा रहे हैं।

किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान न करने की फेहरिस्त में बहराइच जिले में स्थापित नानपारा की सहकारी चीनी मिल भी है। सहकारी चीनी मिल भी किसानों का अभी 17.61 करोड़ रुपये दबाए बैठी है। प्रदेश सरकार की नियंत्रण वाली इस चीनी मिल के भुगतान में देरी पर किसान सकते में हैं। इसको लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

देवीपाटन मंडल की सभी 10 चीनी मिलों की कुल बकाएदारी पर किसानों का 33.69 करोड़ रुपये ब्याज निकल रहा है। पिछले साल भी चीनी मिलों पर गन्ना मूल्य के बकाएदारी पर ऐसे ही ब्याज की रकम निकली थी, जिसे चीनी मिलों ने हजम कर लिया था। इस बार भी किसानों को ब्याज के साथ भुगतान मिल पाएगा, इसकी संभावना नजर नही ंआ रही है। ब्याज न मिलने से किसानों में भी हताशा है।

चीनी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के बाबत कई बार नोटिस जारी कर चेतावनी दी जा चुकी है। चीनी मिल के अधिकारियों व प्रबंध तंत्र को हाईकोर्ट के आदेशों से भी अवगत कराया जा चुका है। इस बाबत शासन को भी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के जिम्मेदारों पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अमर सिंह यादव, उप गन्ना आयुक्त देवीपाटन मंडल गोंडा
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