गोंडा। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर अवधी साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल करने की स्वीकृति दे दी गई है। इसके तहत जिले के लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालयों में पढ़ने वाले बीए के विद्यार्थियों को अगले वर्ष पंचम सेमेस्टर में हनुमान चालीसा पढ़ाई जाएगी। वहीं, एमए के पहले सेमेस्टर से ही सुंदरकांड की चौपाइयों की पढ़ाई शुरू हो गई है।
नए पाठ्यक्रम के अंतर्गत ‘अवधी साहित्य’ नाम से अलग प्रश्नपत्र तैयार किया गया है, जिसमें गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं के माध्यम से भाषा, भक्ति, संस्कृति व लोक जीवन के विविध पक्षों का अध्ययन कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्धि मिलेगी, बल्कि अवध की सांस्कृतिक विरासत से भी सीधा जुड़ाव होगा। एलबीएस पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. जयशंकर तिवारी ने बताया कि इस पहल से क्षेत्रीय भाषाओं व लोक साहित्य को बढ़ावा मिलेगा। नई पीढ़ी अपनी जड़ों व सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सकेगी। शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया है। प्रो. जयशंकर ने बताया कि अभी एलबीएस महाविद्यालय में बीए पंचम सेमेस्टर की पढ़ाई राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के तहत हो रही है। अगले वर्ष मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम के तहत बीए पंचम सेमेस्टर के विद्यार्थी हनुमान चालीसा का अध्ययन करेंगे। वहीं, एमएस प्रथम वर्ष में पाठ्यक्रम लागू किया जा चुका है।