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आवारा मवेशियों ने किसानों को किया तबाह, बर्बाद की फसल

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गोंडा के कटरा बाजार में छुट्टा मवेशी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिले में छुट्टा मवेशियों का आतंक इतना बढ़ गया है कि अब किसान पूरी तरह से त्रस्त हो गए हैं। खरीफ से लेकर रबी की फसलों पर मानों किसी ने डाका मार दिया है। कटरा बाजार इलाके में सैकड़ों हेक्टेयर फसल को मवेशियों ने नष्ट कर दिया। किसान पेट पकड़ कर रह गए। किसानों का कहना है कि तीन साल से मवेशियों के आतंक से किसान पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। अब नौबत यहां तक पहुंच गई कि उन्हें व परिवार का पेट भरने के लिए भी सोचना पड़ रहा है।
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छुट्टा मवेशियों से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार ने गो संरक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए जोर दिया, लेकिन यहां जिले में एक दर्जन से अधिक गो संरक्षण केंद्र ही ठीक से संचालित हो सके हैं। शेष केवल दिखावे के ही रह गए हैं। कटरा बाजार क्षत्र में हजारों हेक्टेयर फसल नष्ट हो चुकी है। कंटीले तारों, ब्लेड तारों से लेकर लकड़ी, बांस के लट्ठों से खेतों की रुंधाई होती है और पूरी रात किसान रखवाली करते हैं इसके बावजूद सैकड़ों छुट्टा जानवर फसलें चट कर रहे हैं।
जगदीशपुर न्यायपंचायत में सैकड़ों किसानों की फसलें तबाह हो चुकी है। पूरे बदल, रामापुर, बनगांव, भरथा इटहिया, चुर्रामुर्रा, गौरवा जानीपुर, तिवारीपुरवा, मिश्रनपुरवा, नएपुरवा, कटहवा, चौबेपुरवा सहित आसपास के सभी गांवों में किसानों की बहुत बड़ी रेगाही है। यहां छुट्टा जानवरों के लिए न कोई व्यवस्था है न कोई सुनने वाला। गौरवा जानीपुर में किसानों की 50 बीघे से अधिक फसल नष्ट हो गई। यहां अरहर, गन्ना, सरसो की फसल नष्ट हो चुकी है। मिश्रनपुरवा के किसान विंदेश्वरी प्रसाद, गौरवा के कामेश्वरी प्रसाद की सरसौ की फसल को मवेशी चट कर गए। हरिओम मिश्र की दो बीघा अरहर, पांच बीघा गन्ना नष्ट हो गया।
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किसानों को लूट रहे कंटीले तार बेचने वाले
फसल को बचाने के लिए किसान खेती की लागत से अधिक उसे बचाने में खर्च कर रहा है। किसान कामेश्वरी प्रसाद मिश्र ने बताया कि एक बीघा फसल को बचाने के लिए यूकेलिप्टस के तीन पेड़ खरीद कर उसमें तीन या चार फेरा में कंटीला तार लगाना पड़ता है। इस पर दो से तीन हजार रुपए का खर्च आता है। ऐसे में किसान खेती की लागत से अधिक खर्च कर फसल बचाने की कोशिश करता है इसके बावजूद फसल नहीं बच पाती है।
रोस्टर बनाकर दिन-रात करनी पड़ती है रखवाली
किसान राम लखन मिश्र ने बताया कि फसल बचाने के लिए 24 घंटे यदि रखवाली की जाती है तब भी फसल बचा ना मुश्किल है। दिन रात रखवाली के लिए घर के सदस्यों को रोस्टरवार रखवाली करनी पड़ती है। रखवाली करने के बाद एक दर्जन मवेशी खेतों में कूद जाते हैं और एक तरफ से भगाओ तो दूसरे के खेत में चले जाते हैं जिससे झगड़े तक की नौबत आ जाती है।
खेती से तौबा करने का वक्त आ गया
किसान फूलचंद, सहदेव प्रसाद व अलख राम ने बताया कि किसानों को अब खेती से कोई लाभ नहीं हो रहा है। एक बीघा खेत में हम लोग कम से कम तीन क्विंटल गेेंहूं पैदा करते थे अब एक क्विंटल भी नही निकलता है। बचाते-बचाते फसल आधी रह जाती है। जो केवल कंटीले तार लगाकर सुरक्षित समझते हैं उनके खेत में एक दाना भी नहीं बचता है। अलख राम दूबे ने बताया कि हरिओम मिश्र के खेत में चारों तरफ से कंटीले तार लगे थे लेकिन पांच बीघा गन्ना तथा तीन बीघा अरहर मवेशी चट कर गए।
जगदीशपुर न्याय पंचायत में नहीं बना गो संरक्षण केंद्र
कटरा बाजार के जगदीशपुर न्याय पंचायत में एक भी गोशाला का निर्माण नहीं हुआ है। जिससे यहां के मवेेशी व अन्य गांवों से गुजरने वाले मवेशियों का झुंड एकसाथ धावा बोलता है। जिससे फसल नहीं बच पा रही है।
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