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खत्म हो रहा राजकीय पुष्प पलाश, छिन रहा 200 परिवारों का रोजगारा

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खत्म हो रहा राजकीय पुष्प, छिन रहा 200 परिवारों का रोजगार
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सवा सौ एकड़ में प्रदेश की धरोहर को बचाने की जद्दोजहद
करुणा गोशाला के साथ नेचर क्लब ने उठाया मनोरमा किनारे खूबसूरीती बचाने का बीड़ा
फोटो-3-4-5
गोंडा। मनकापुर तहसील के अंतर्गत ग्राम सिसवा स्थित पलाश के जंगल को माफियाओं की नजर लग गई है। उत्तर प्रदेश का राजपुष्प पलाश यहां करीब 112 एकड़ में फैला हुआ था जो अब सिमट कर 50 एकड़ में पहुंच गया है। जंगल के मध्य ही अब कई भवनों का निर्माण हो रहा है जिससे पेड़ों की कटान भी हो रही है। इस पलाश के जंगल से करीब 200 परिवारों की जिंदगी चलती है। पत्तल बनाने के काम में आने वाले इन पेड़ों का धीरे-धीरे अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। रविवार को नेचर क्लब फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने सिसवा में पहुंचकर इन पेड़ों को बचाने का बीड़ा़ उठाया है। इसके लिए करुणा गोशाला पिछले 40 साल से अभियान चलाए हुए है।
पलाश उत्तर प्रदेश का राजकीय पुष्प है तथा विभिन्न तरीकों से लोगों को रोजगार, जल एवं वन्यजीवों का संरक्षण आदि करते हैं। नेचर क्लब के अभिषेक दूबे ने बताया कि ग्राम सिसवा में मनोरमा नदी के किनारे पलाश के जंगल हैं जिसमें पलाश, पीपल, महुआ, नीम, अर्जुन के सैकड़ों वृक्ष लगे हैं परंतु अभी 5 एकड़ का आश्रम पद्धति विद्यालय बनवाने के लिए सैकड़ों वृक्ष काटे गए हैं तथा अटल आवासीय विद्यालय बनवाने के लिए पलाश के जंगलों की 15 एकड़ भूमि का भी प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है जिसमें पलाश, पीपल, महुआ, नीम आदि के करीब 500 से अधिक वृक्ष लगे हैं। सरकारी अभिलेखों में यह भूमि बंजर भूमि के रूप में दर्ज है परंतु 2014 में वन विभाग के टिकरी रेंज के रेंजर ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि उक्त भूमि के 95 प्रतिशत हिस्से पर पलाश के जंगल हैं। सिसवा के अतुल शुक्ल बताते हैं कि करीब 200 परिवार को रोजी-रोटी पलाश के वृक्षों से उसके पत्ते का दोना बनाकर चलती है तथा लोग घर में चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी भी पलाश के जंगलों से ही प्राप्त होती है। साथ ही ग्रामीणों के जानवर भी इसी वन में चरने के लिए जाते हैं और यदि अटल आवासीय विद्यालय भी यहां बना तो 200 से अधिक परिवार की भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। सिसवा के ही जगतपाल शुक्ल ने बताया कि राजपुष्प पलाश उनके गांव की शान है तथा मनोरमा के किनारे पलाश के इसी जंगल में हर वर्ष छठ पूजा के अवसर पर मेला लगता है। प्रकृति प्रेमी मोहित महंत ने बताया कि पलाश के वृक्ष टेढ़ी, बिसुही और मनोरमा नदी के किनारे प्राकृतिक रूप से उगते हैं तथा बड़ी संख्या में वन्यजीवों को आश्रय देते हैं। इसलिए इस खूबसूरत और गोंडा की शान सिसवा के पलाश के जंगलों को कटवाना बहुत पीड़ादायक है और जलवायु परिवर्तन के इस युग में एक शर्मनाक हरकत है।
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ग्रामीणों ने पलाश की बगिया बचाने की लगाई गुहार
सिसवा में अभियान के दौरान रविवार को करीब तीन दर्जन ग्रामीणों ने सरकार से पलाश की बगिया को बचाने की गुहार लगाई तथा जंगल को काटने का प्रस्ताव करने वालों के प्रति नाराजगी जताई। इस अवसर पर सभी ने जिलाधिकारी के नाम सामूहिक रूप से एक पत्र लिखकर अटल आवासीय विद्यालय के लिए कोई अन्य भूमि तलाशने का तथा उनकी जीवनरेखा पलाश के जंगलों को न काटने का अनुरोध किया। इस अवसर पर नेचर क्लब के आयुष पांडेय, सोनू तिवारी व ग्रामीणों में शिखर शुक्ल, विद्या प्रसाद शुक्ल, सुनील, ऋषिकेश, भगौती प्रसाद, जगदीश, मोनू, पंकज, बृजराज, मंटू, रक्षाराम आदि मौजूद रहे।
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