रुपईडीह। बनगाई गांव में वर्ष 1941 में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान स्थापित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अब बदहाली का शिकार है। जर्जर भवन और चारदीवारी के अभाव में अस्पताल परिसर की खाली जमीन पर अवैध कब्जे का खतरा बना हुआ है। कभी इस अस्पताल में 50 किलोमीटर दूर से लोग इलाज कराने आते थे।
ग्रामीणों के अनुसार आर्यनगर-करनैलगंज मार्ग पर स्थित इस अस्पताल की स्थापना अंग्रेज गवर्नर ने कराई थी। उस समय पांच कमरों और बड़े बरामदे वाले अस्पताल के पास 84 डिस्मिल जमीन थी, जहां फलदार पौधे और सब्जियां उगाई जाती थीं। सेवानिवृत्त उप निरीक्षक त्रियुगी नारायण चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त शिक्षक देवेंद्र नाथ मिश्र और जितेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अस्पताल खंडहर में बदल रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 15 वर्ष पहले भवन निर्माण के लिए भेजे गए लाखों रुपये का सही उपयोग नहीं हुआ। ठेकेदार ने पुराने भवन के आगे दो छोटे कमरे और बरामदा बनाकर मूल भवन का स्वरूप बदल दिया। पांच वर्ष पहले मिले 15 लाख रुपये से भी केवल रंगाई-पुताई कराई गई।
वर्तमान में चिकित्साधिकारी डॉ. कमल वर्मा, वार्ड बॉय अब्दुल नईम सिद्दीकी, योग शिक्षिका रुचि शुक्ला और माली मिश्री लाल तैनात हैं। डॉ. वर्मा ने कहा कि पर्याप्त जमीन होने से यहां 100 बेड का अस्पताल बनाया जा सकता है।