गोंडा। स्टाफ नर्सों ने शुक्रवार को डीएम से मिलकर अपने बहाली की मांग की। जिलाधिकारी ने इस मामले में स्टाफ नर्सों को मामले में सीएमएस से जानकारी लेकर कुछ कर पाने की स्थित बनने की बात कह कर उनके साथ किसी स्तर से गलत न होने का आश्वासन दिया है। संविदा पर तैनात रहे स्टाफ नर्स कर्मियों की संविदा पूरी हो जाने के बाद जिला अस्पताल ने उन्हें हटाने के साथ उनके बारे में दोबारा तैनाती होने या भविष्य में तैनात किये जाने के मामले में हाथ खड़े कर दिये हैं।
पिछले साल 10 स्टाफ नर्स की पूर्व सीएमओ के स्तर पर जिला अस्पताल में तैनाती करायी गई थी। शुरूआती दौर में स्टाफ नर्स कर्मियों की छह माह के लिए अनुबंध पर लखनऊ की अवनी परिधि संस्था की ओर से नियक्ति की गई थी। जिला अस्पताल में कर्मियों से अब तक कार्य लिया जाता रहा। पिछले सप्ताह गोंडा पहुंची प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव वी हेकली झींमोमी ने अस्पताल का जायजा लेने के दौरान देखा कि वार्डों व स्टाफ कक्ष में कुछ जरूरत से अधिक स्टाफ नर्स की तैनाती है। उन्होंने इस बारे में प्रमुख अधीक्षक डॉ. अरूण लाल से जानकारी ली।
यह पता चलने पर कि तैनाती तय मानक से अधिक है तो उन्होंने इसे नियम विरुद्ध करार देते हुए तय मानक से अधिक कर्मियों को हटाने का निर्देश दे दिया। इसके बाद जिला अस्पताल ने सभी 10 स्टाफ नर्स को उनकी सेवा से मुक्त कर दिया। इस बारे में बेरोजगार हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक व जिला मुख्य चिकित्साधिकारी से मिलकर अपनी तैनाती बहाल रखने की अपील की लेकिन सभी ने नियमों की दुहाई देकर कुछ भी कर पाने में असमर्थता जता दी। तब से स्वास्थ्य कर्मी भटक रहे हैं।
शुक्रवार को सभी स्टाफ नर्स कर्मियों ने डीएम को पत्र देकर अपनी बहाली की मांग की है। स्वास्थ्य कर्मियों का तर्क है कि उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात करके काम लिया जा सकता है। उनकी न सुनी गई तो वह अपनी मांगों को लेकर 20 अगस्त से निदेशालय लखनऊ में धरना देंगे। जबकि इस बारे में सीएमओ डॉ. मधु गैरोला का कहना है कि इन कर्मियों से काम लेने न लेने का निर्णय इनकी नियोक्ता कंपनी को लेना है। उनके पास इन कर्मियों से कार्य लेने का कोई नियम औचित्य नहीं है।