सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह से बैन लगाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फरमान का असर जिले में दिखना शुरू हो गया है। इसे लेकर एक तरफ जहां योगी के बनाए संगठन हिंदू युवा वाहिनी ने ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, तो वहीं जिला अस्पताल में तैनात आधा दर्जन डॉक्टरों ने इस्तीफे की पेशकश की है।
गुरुवार को जिला अस्पताल के छह डॉक्टरों ने अपना इस्तीफा सीएमएस को देकर शीघ्र कार्यमुक्त किए जाने की मांग की है। उधर, सीएमएस ने डॉक्टरों से मिले इस्तीफे की फाइल शासन को भेज दिशा-निर्देश मांगा है।
बतौर सीएमएस जब तक शासन इन डॉक्टरों का इस्तीफा स्वीकार नहीं करता है तब तक यह डॉक्टर पहले की तरह जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं देते रहेंगे। सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर बैन लगाने के आदेश तो सरकार ने कई बार दिए।
लेकिन आज तक उसका कोई खास असर इन डॉक्टरों की सेहत पर नहीं पड़ा। लेकिन ऐसा पहली बार है, जब किसी मुख्यमंत्री के प्राइवेट प्रैक्टिस पर बैन को लेकर दिए गए बयान के बाद न सिर्फ ऐसे डॉक्टरों की बेचैनी बढ़ी है, बल्कि उनकी बेचैनी का असर इस्तीफे के रूप में भी दिखाई पड़ने लगा है।
हालांकि जिला अस्पताल में तैनात जिन छह डॉक्टरों ने इस्तीफे की पेशकश की है, उसमें से किसी ने इसकी वजह खुद के बिगड़ते स्वास्थ्य को माना है तो किसी ने घरेलू और पारिवारिक तनाव को।
जिला अस्पताल के जिन डॉक्टरों ने इस्तीफा सीएमएस डा. रतन कुमार को दिया है, उसमें डा. आलोक शुक्ला व डा. समीर गुप्ता फिजीशियन के पद पर कार्यरत हैं। वहीं डा. घनश्याम गुप्ता बाल रोग विशेषज्ञ हैं।
जबकि डा. डीके राव हड्डी रोग विशेषज्ञ व डा. शादाब सर्जन के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा डा. अजीत सिंह चर्मरोग विशेषज्ञ हैं। हालांकि गुरुवार को इस्तीफे का आवेदन सीएमएस को दिए जाने के बाद भी यह डॉक्टर नियमित रूप से अपनी ओपीडी में मरीजों को देखते रहे।
इस बाबत जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डा. वीसी गुप्ता ने बताया कि जिला अस्पताल के छह डॉक्टरों से उन्हें इस्तीफे का आवेदन मिला जरूर है। लेकिन उसे स्वीकार करने का अधिकार इन डॉक्टरों को नियुक्ति प्रदान करने वाले नियुक्ति प्राधिकारी के पास ही होता है।
इसलिए जब तक इनका इस्तीफा इनके नियुक्ति प्राधिकारी की ओर से स्वीकार नहीं किया जाता है, तब तक के लिए यह डॉक्टर ओपीडी मेें नियमित रूप से बैठकर अपना कामकाज निपटाएंगे।
रही बात इनके इस्तीफे की तो सभी डॉक्टरों से मिले इस्तीफे की पत्रावली शासन को भेज दी गई है। वहां से इस संबंध में जो निर्देश उन्हें मिलते हैं, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।