फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gonda News: बैंक में पसरा सन्नाटा, खाताधारकों की बढ़ी चिंता

Wed, 14 Jan 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
विज्ञापन
कोआपरेटिव बैंक।
विज्ञापन
गोंडा। बड़गांव पुलिस चौकी चौराहे पर स्थित यूपी कोऑपरेटिव बैंक की शाखा में बुधवार दोपहर 12:30 बजे के वक्त सन्नाटा था। बाहर गेट पर सुरक्षाकर्मी हर आने जाने वाले की इंट्री करने के बाद ही उसे अंदर जाने दे रहा था। अंदर बैंक कर्मी थे। बाहर सीसीटीवी को सही कराया जा रहा था। बैंक कर्मी अपने-अपने पटल पर काम कर रहे थे।
विज्ञापन

बाहर मिले लोगों का कहना था कि जो जैसा करेगा, वह वैसा ही भरेगा। फिलहाल, कुछ विभागीय कर्मी भी हताश दिखे। जांच का दायरा बढ़ा तो कई और इसमें फंस सकते हैं। फिलहाल, खाताधारकों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, आरोपों की जद में आए कर्मचारी साजिश के तहत फंसाए जाने का आरोप लगा रहे हैं। मामले की जांच कर रहे विवेचक सभाजीत सिंह का कहना है कि वह अभी बाहर है।

पीड़ितों का दर्द, किसी ने हमारी नहीं सुनी
खाताधारक शिवेंद्र दूबे ने बताया कि कोऑपरेटिव बैंक से प्रापर्टी लोन साढ़े नौ लाख रुपये लिया। इसकी किस्त 12500 दे रहे थे। एक साल से किस्त बंद हो गई। बैंक गए तो पता चला कि टेक्निकल समस्या है। इसलिए किस्त नहीं जमा हो रही है। एक-दो महीने में समस्या दूर हो जाएगी। इसके दो महीने बाद गए तो स्टाफ बदल गया था। नए स्टाफ से खाता नंबर बताया तो उनके खाते से 31 लाख रुपये का लोन करके निकाल लिया गया। इसके बाद तत्कालीन प्रबंधक से बात की तो गड़बड़ी की बात स्वीकार की। इस बीच बैंक की ओर से नोटिस भी आ गई। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से गोहार लगाई। तब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ।
विज्ञापन




राज प्रसाद मौर्य ने बताया कि पत्नी के नाम 11 लाख रुपये लोन लिया था। इसकी किस्त प्रतिमाह दे रहे थे। एक दिन बैंक गए तो उनके खाते में दो लाख 89 हजार थे। तीसरे दिन गए और 50 हजार रुपये का विड्राल भरा। कैशियर को दिया तो उन्होंने बताया कि खाते में सिर्फ नौ हजार रुपये हैं। पीड़ित ने बताया कि दो दिन पहले 2.89 लाख रुपये थे। कैशियर ने बताया कि उनका एक और करंट अकाउंट खुला है। इसमें 33 लाख रुपये का लोन मौर्या वस्त्र भंडार के नाम से है। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। तत्कालीन प्रबंधक ने फर्जी तरीके से नो ड्यूज भी बनाकर दे दिया। नए शाखा प्रबंधक को पत्र दिया तब जाकर कार्रवाई शुरू हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें