गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हिस्सेदारी करने वाले अब चुनावी खर्च का हिसाब देने से किनारा कस रहे हैं। जिले में प्रधान समेत 4833 पदों के लिए 21935 दावेदारों ने चुनाव में हिस्सेदारी की थी।
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चुनाव परिमाण की घोषणा की तिथि से तीन माह की मियाद में चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च का हिसाब किताब देना जरूरी होता है। दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद अभी तक एक भी प्रत्याशी ने चुनावी खर्च का ब्यौरा प्रस्तुत नहीं किया है।
जिले में पंचायत चुनाव द्वितीय चरण में था और 19 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। लेकिन मतगणना के बाद परिणामों की घोषणा दो मई को हुई थी। नियमों के तहत प्रत्याशियों को खर्च का पूरा हिसाब किताब तीन अगस्त तक देना जरूरी है।
पंचायत चुनाव में सर्वाधिक खर्च प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य ही करते हैं। अधिकांश ग्राम पंचायतों में प्रधानों के साथ ही बीडीसी व डीडीसी ने खर्च की तय सीमा से कई गुना अधिक खर्च प्रचार प्रसार में किया है।
ऐसे में खर्च का पूरा हिसाब किताब तैयार करना भी प्रत्याशियों के बढ़ी परेशानी बना है। निर्वाचन आयोग की मानें तो हिसाब न देने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि वापस नही होगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को प्रचार-प्रसार करने की सीमाएं निश्चित थीं। चुनाव के बाद उन्हें उसी सीमा में खर्च का ब्योरा जमा करना है।
चुनाव में ग्राम प्रधान और बीडीसी सदस्य के लिए 75-75 हजार, ग्राम पंचायत सदस्य के लिए दस हजार और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 1.50 लाख खर्च की सीमा तय थी। बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत सदस्यों को छोड़ दिया जाए तो अन्य ने निर्धारित से अधिक धनराशि चुनाव में खर्च की है।
पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में 745 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है। यही नही 10 जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी ऐसे हैं जो चुनाव तो जीत गए हैं, लेकिन जमानत जब्त हो गई है। 65 जिला पंचायत सदस्य पदों के 840 प्रत्याशी मैदान में थे। जिसमें 105 ही अपनी जमानत बचाने में सफल रहे। इसी तरह पांच हजार से अधिक पंचायत के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो चुकी है।