पंचायत चुनाव के चौथे व अंतिम चरण में कड़ाके के ठंड के बाद भी लोकतंत्र को मजबूत करने की हवा काफी गर्म रही। मतदाताओं में इस कदर उत्साह रहा कि कोहरे के बीच पगडंडियों पर लोकतंत्र इठलाता दिखा। महिलाओं ने पहले वोट डाला और फिर एक दूसरे का हाल चाल पूछा।
अधिकांश गांवों में करीब दो बजे तक दो तिहाई वोट पड़ चुके थे। वृद्ध हो या बीमार सभी में मतदान करने की ललक दिखी। डिडिसिया कला निवासी स्वामी शुक्ल काफी दिनों से बीमार थे।
उम्र अधिक होने के कारण वह बिना किसी सहारे के चल फिर नहीं सकते थे, उसके बावजूद वह दो लोगों के सहारे वोट डालने पहुंचे।
इसी तरह तरबगंज में एक व्यक्ति ठेले पर बैठकर वोट डालने पहुंचा। इसी तरह तरबगंज में एक बीमार वृद्ध को लोग गोद में उठाकर वोट डलवाने पहुंचे। दामोदरपुरवा की पत्नी बीमार राधा देवी भी लोगों के सहारे वोट डालने पहुंची।
गांव में अपनी सरकार चुनने को लेकर इस कदर उत्साह रहा कि दादी अपनी पौत्रवधू के साथ मतदान करने पहुंची। रास्ते में महिलाएं आपस में बात करते हुए गांव की तरक्की को लेकर कुछ ज्यादा ही गंभीर दिखी। युवतियों का कहना था कि युवाओं का मौका मिलने से निश्चित ही गांव का विकास होगा।
गोंडा के धनई पट्टी निवासिनी कुसुमा, खुशबू, राधा ने पहली बार मतदान किया। लोकतंत्र में अपनी इच्छा जताने का मौका मिलने से उत्साहित युवतियों का कहना था कि जब युवा गांव के विकास के लिए गंभीर होंगे तभी देश का विकास हो सकेगा।
लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी देने के लिए घूंघटवालियां भी पीछे नहीं रही। इन्होंने कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और फिर जाकर मतदान किया। कई जगहों पर ससुराल में हाल में नई नवेली दूल्हनों ने पति व भाई के डसाथ पहुंचकर मतदान किया।