गोंडा। परिवार नियोजन के लिए नवविवाहितों को मिलने वाली नई पहल किट (शगुन किट) की खरीद व वितरण में लाखों के खेल का मामला सामने आया है। सीएमओ की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मई माह में 12,508 किट भेजने का निर्देश दिया गया था। इसके इतर विभागीय अफसरों व ठेकेदारों की साठगांठ से सीएचसी को सिर्फ 5500 किट ही भेजी गयी। प्रत्येक किट की खरीद कीमत तीन सौ रुपया थी। इस तरह 7008 शगुन किट वितरण के लिए न देकर 21.24 लाख रुपयों की बंदरबांट आपस में कर ली गयी। संयुक्त निदेशक से हुई इस मामले की शिकायत के बाद किट खरीद में हुआ खेल उजागर हुआ। इस पूरे मामले पर संयुक्त निदेशक ने सीएमओ से जवाब तलब किया है।
परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत ही सीएमओ की ओर से सभी स्वास्थ्य केंद्रों को नवविवाहितों के लिए नई पहल किट (शगुन किट) दिया जाना था। स्वास्थ्य केंद्रों से इन शगुन किट को आशा के माध्यम से गांवों के नव दंपति जोड़ो को वितरित करना था। बीते सोमवार को संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्रों को शगुन किट कम दिए जाने का मामला सामने आया था।
करनैलगंज सीएचसी पर निरीक्षण करने पहुंचे जेडी ने जब बीसीपीएम (ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर) से किट के संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने परिवार नियोजन के लिए दी जाने वाली शगुन किट कम संख्या में मिलने की बात कही। बताया कि उन्हें 648 के इतर मात्र 286 किट देकर हस्ताक्षर करवा लिया गया। कुछ दिन के बाद जब बीसीपीएम ने चीफ फार्मासिस्ट अशोक वर्मा तथा परिवार नियोजन के लाजिस्टिक मैनेजर सलाऊद्दीन लारी से कम किट मिलने की शिकायत भी की। जेडी स्तर से हुई जांच पड़ताल में अन्य ब्लॉक में भी शगुन किट कम दिए जाने का मामला सामने आया।
व्हाट्सअप ग्रुप ने खोला राज
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर नई पहल किट (शगुन किट) कम दिए जाने की शिकायत सामने आने के बाद भी विभागीय जिम्मेदारों ने पूरे मामले को दबाए रखा। इस संबंध में विभाग की ओर से बनाए गए एक अधिकारिक व्हाट्सअप ग्रुप में सभी विकास खंडों में कम किट देकर ज्यादा की सप्लाई दिखाने की शिकायत की गयी। मिशन परिवार विकास गोंडा के नाम से बने इस व्हाट्सअप ग्रुप में सभी बीसीपीएम ने बताया कि उन्हें कम किट देकर जबरन पूरी किट प्राप्त करने की रिसीविंग ले ली गयी। करनैलगंज के अलावा सीएचसी मनकापुर में 576 के सापेक्ष 400 किट, सीएचसी बेलसर 812 के सापेक्ष 460 किट, सीएचसी वजीरगंज में 755 के सापेक्ष 355 किट ही दी गयी। इसी तरह सीएचसी रुपईडीह पर 964 के सापेक्ष 400 नई, सीएचसी छपिया में 715 के सापेक्ष 332 नई पहल किट (शगुन किट) दिया गया। अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी आधे से कम किट वितरण को मुहैया करायी गयी।
एक किट की खरीद पर तीन सौ का खर्च
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए नवविवाहितों को दिए जाने वाले नई पहल किट (शगुन किट) में एक जूट का बैग के साथ विवाह पंजीकरण फार्म, पंपलेट, स्वच्छता बैग, तौलिया, कंघी, बिंदी, नेलकटर, दो रूमाल व एक छोटा शीशा शामिल है। इसी के साथ दो पैकेट कंडोम, दो गर्भ निरोधक गोलियां माला-एन, तीन आपातकालीन गर्भ निरोधक गोलियां, एक पैकेट साप्ताहिक गर्भ निरोधक गोलियां एवं दो प्रेग्नेंसी जांच किट रहती है। प्रत्येक किट की खरीद पर तीन सौ रुपया का खर्च आया है।
नई पहल किट (शगुन किट) की खरीद व वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। व्हाट्सअप चैट व अन्य माध्यमों से सभी सीएचसी पर खरीद के बाद भी कम किट वितरण को दिए जाने की बात सामने आई। संबधित मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पूरे मामले की गहन जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय होगी। डॉ. अनिल मिश्र, संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण