गोंडा। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को परखा। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में कई तरह खामियां मिलने पर उन्होंने सख्त नाराजगी जताते हुए इसमें सुधार लाने के लिए जिम्मेदारों को निर्देशित किया। निरीक्षण के दौरान सुबह 11:42 मिनट पर अधिकांश सीनियर डॉक्टर ओपीडी से नदारद मिले। उनकी जगह जूनियर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे। उन्होंने कार्य संस्कृति में सुधार लाने की ताकीद करते हुए कहा कि डॉक्टरों पर लोगों का भरोसा होता है, इसलिए अपने दायित्वों के प्रति संवेदनशील बनें।
डीएम सुबह सवा ग्यारह बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। उन्होंने करीब 80 मिनट तक मेडिकल कॉलेज में रहकर ओपीडी, वार्ड, शौचालय और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। वह दोपहर एक बजे करीब निरीक्षण समाप्त कर वापस लौटीं। निरीक्षण के दौरान अधिकांश वरिष्ठ चिकित्सक अनुपस्थित मिलने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है।
निरीक्षण के दौरान ओपीडी नंबर-10 में रजिस्टर के रखरखाव में भी अनियमितताएं मिलीं। मरीजों से बातचीत कर उन्होंने उपचार और सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। डीएम ने मौजूद प्रधानाचार्य को निर्देश दिया कि चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ओपीडी में बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्यतौर पर लागू कराया जाए। मौजूद स्टॉफ ने बताया गया कि 30 नर्सों के स्थान पर केवल चार-पांच नर्सें ही कार्यरत हैं। इस पर डीएम ने आवश्यक कार्रवाई कर स्टाफ की कमी दूर करने के लिए निर्देशित किया। निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. बीना सिंह, सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल, सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. डीएन सिंह, एसीएमओ डॉ. जयगोविंद, डॉ. रजनीश, डॉ. दीक्षा और अनिल वर्मा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कैसे हो सफाई, एजेंसी तक नामित नहीं
निरीक्षण के दौरान शौचालय समेत कई स्थानों पर गंदगी मिलने पर भी डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। अधिकारियों ने बताया कि सफाई के लिए अभी तक कोई एजेंसी नामित नहीं की गई है। इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए डीएम ने तत्काल एजेंसी नामित करने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र की स्थापना की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के लिए भी कहा। साथ ही सभी ओपीडी के बाहर संबंधित चिकित्सकों की नेम प्लेट भी अनिवार्य तौर पर लगाने के लिए कहा, ताकि मरीजों को इलाज के दौरान परेशानी न उठानी पड़े।
15 दिन में शुरू हो ईएनटी व नेत्र वार्ड
निरीक्षण के दौरान डीएम ने देखा कि ईएनटी और नेत्र रोग (आई) वार्ड के संचालन में अनावश्य देरी हो रही है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने मौजूद प्राचार्य से देरी पर भी सवाल उठाए। इसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने 15 दिन के भीतर दोनों वार्डों का संचालन शुरू कराने के निर्देशित किया।