गोंडा। सीएचसी-पीएचसी समेत सभी अस्पतालों की सुरक्षा के लिए आउटसोर्स पर रखे गए सुरक्षाकर्मियों को सेवा समाप्ति की नोटिस मिलने के बाद आक्रोशित होकर उन्होंने सीएमओ दफ्तर का घेराव किया। इस दौरान करीब दो घंटे तक कार्यालय में अफरातफरी का माहौल रहा। कर्मियों के आंदोलन से मेडिकल कॉलेज, महिला अस्पताल व सीएचसी की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई।
अस्पतालों की सुरक्षा के लिए सीएमओ की ओर से 67 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की स्वीकृति मिली थी। सीएमओ ने आगरा की मेसर्स मयंक एजेंसी की ओर से 43 सुरक्षा गार्डों की तैनाती मेडिकल कॉलेज में की गई थी, जो विभिन्न अस्पतालों के प्रवेश गेट, इमरजेंसी, पर्चा काउंटर, लैब व ओपीडी के बाहर तैनात थे। लेकिन शासन की ओर से अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूर्व सैनिकों की तैनाती का आदेश मिलने के बाद सेवाप्रदाता एजेंसी ने 24 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती व्यवस्था समाप्त करने का नोटिस दे दिया। सूचना सुरक्षाकर्मियों ने आक्रोश जताते हुए सीएमओ कार्यालय का घेराव किया। कहा कि उनका करार 11 महीने के लिए हुआ था, लेकिन अधिकतर लोगों की नियुक्ति हुए अभी दो से तीन महीने ही हुए हैं। ऐसे में उनकी नौकरी खत्म करना सेवा शर्तों का उल्लंघन है।
सुरक्षाकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने सीएमओ से मुलाकात कर अपनी बात रखी। इस पर सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड से पूर्व सैनिकों की मांग की है, लेकिन कितनी संख्या में पूर्व सैनिक मिल सकते हैं, इसकी जानकारी नहीं दी गई। यदि आवश्यकता से कम संख्या में पूर्व सैनिक मिलते हैं, तो वर्तमान सुरक्षाकर्मियों से सेवा ली जाएगी। उसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने कलेक्ट्रेट में जाकर जिलाधिकारी नेहा शर्मा को ज्ञापन देकर अपनी समस्या बताई। डीएम ने सीएमओ से जानकारी कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
मेडिकल कॉलेज, महिला अस्पताल सहित सीएचसी पर 43 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जो अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था देखते थे। सोमवार को कर्मियों के कार्य बहिष्कार से व्यवस्थाएं चरमरा गईं। ओपीडी से लेकर पर्चा काउंटर व इमरजेंसी के सामने मरीजों की अफरातफरी दिखाई पड़ी। तीमारदारों ने अपने वाहन बेतरतीब तरीके खड़े कर दिए, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। महिला अस्पताल में इमरजेंसी के बाहर मरीजों की भारी भीड़ जुटी रही।