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60 करोड़ रुपए से 401 पंचायतों में बनेंगे सचिवालय

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गोंडा। अब पंचायत भवनों में सरकारी दफ्तर गुलजार होंगे। 60 करोड़ रुपये से 401 पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण जल्द ही होगा। सचिवालयों के निर्माण में पंचायतों के बजट के साथ ही मनरेगा का बजट भी शामिल किया गया है। इससे दस हजार से अधिक श्रमिकों को गांवों में ही रोजगार भी हासिल होंगे। पंचायतों में दो तरह के सचिवालय बन रहे हैं, जिसमें 359 पंचायतों में प्रत्येक पर 14 लाख पांच हजार रुपये बजट से दो कमरे का सचिवालय बनेगा। इसी तरह 42 पंचायतों में 22.28 लाख रुपए का खर्च चार कमरों के प्रत्येक सचिवालय पर होगा।
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जिले की 1054 पंचायतों में 401 ऐसी पंचायतें हैं, जहां पर अभी तक सचिवालय ही नहीं थे। सचिवालय निर्माण में बजट की कमी थी। मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने शासन से अतिरिक्त बजट भी नहीं मांगा और पंचायतों में उपलब्ध बजट के आधार पर योजना तैयार की। 15वें वित्त और मनरेगा के उपलब्ध बजट को जोड़कर योजना तैयार की।
दो कमरों के सचिवालय पर 50 करोड़ 43 लाख 95 हजार रुपये का बजट तय किया। चार कमरों के सचिवालयों पर नौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट खर्च होगा, जिसमें मनरेगा से 50 फीसदी धनराशि दी गयी है। इसमें 14 लाख पांच हजार रुपये की लागत से बनने वाले दो कमरों के प्रत्येक सचिवालय के निर्माण पर दो लाख 34 हजार 724 रुपए का बजट श्रमिकों पर खर्च खर्च होगा।
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इसी तरह 22.28 लाख रुपये के बजट से चार कमरों के सचिवालय निर्माण में तीन लाख 71 हजार 795 रुपये का बजट श्रमिकों पर खर्च होगा। बाकी का बजट सामग्री पर खर्च होना है। दोनों तरह के बनने वाले सचिवालयों के निर्माण में गांवों के श्रमिकों पर करीब आठ करोड़ रुपये का बजट खर्च होगा और इससे करीब दस हजार श्रमिकों को रोजगार हासिल हो सकेगा। योजना से एक तो हर गांवों में सचिवालय का सपना पूरा होगा।
लोगों को काम के लिए नहीं लगानी होगी दौड़
401 पंचायतों में नए सचिवालयों में निर्माण होने और 653 में पहले से ही सचिवालय होने से उन्हें ठीक कराकर शुरू किया जा रहा है। 1054 सचिवालयों में रोस्टर से सचिव बैठेंगे और साथ में ही लेखपाल और अन्य पंचायत के कर्मचारी बैठेंगे।
इससे गांव के लोगों को रोजगार उपलब्ध होने के साथ ही राशन कार्ड की समस्या दूर होगी। परिवार रजिस्टर का अपडेशन के अलावा पंचायतों में विकास की समस्याओं की सुनवाई हो सकेगी। लोगों को आसानी से पंचायत के सचिव मिल सकेंगे, जिससे वह अपनी स्थानीय समस्या बताकर समाधान करा सकेंगे। अभी पंचायत सचिवों को उनके घर या हफ्ते में ब्लाक पर होने वाली बैठकों में खोजना पड़ता है। इससे लोगों को काम के लिए दौड़ नहीं लगानी होगी।
13136 पंचायत सदस्यों को मिलेगा बैठने का ठिकाना
जिले की पंचायतों में ग्राम प्रधान के साथ ही पंचायत सदस्यों को कोई स्थान बैठने के लिए नहीं है। 1054 पंचायतों में प्रधान व सचिव के साथ ही 13136 पंचायत सदस्य भी हैं। प्रधान तो घर पर अपना दरबार सजा लेते हैं लेकिन पंचायत सदस्यों के लिए कोई स्थान नहीं है। अधिकतर बैठकें स्कूलों में होती हैं। अब सचिवालय के शुरू होने से सदस्य भी बैठकर विकास पर अपनी सलाह दे सकेंगे। अभी वह सिर्फ बैठकों में ही बुलाए जाते हैं जो साल में एक या दो बार ही होते हैं। हर पंचायत में 10 से 15 सदस्य चुने जाते हैं लेकिन वह सिर्फ पंचायत के कोरम को पूरा करने तक सीमित हैं।
प्रत्येक पंचायत में सचिवालय उपलब्ध कराने के लिए 60 करोड़ रुपये की कार्य योजना स्वीकृत की गई है। कार्य भी शुरू हैं। जल्द ही सभी पंचायतों में अच्छा सचिवालय होगा। इसके लिए शासन से कोई अतिरिक्त बजट नहीं लिया गया है और श्रमिकों को रोजगार भी दिया जा रहा है।
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- शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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