वर्षों से वीरान पड़े श्रीराम जानकी चतुर्भुजी मंदिर के दिन जल्द ही बहुरने वाले हैं। जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने इस मंदिर के लिए एसडीएम को बतौर प्रशासक नियुक्त किया है, जो अब से इस मंदिर की समस्त देखरेख का दायित्व निभाएंगे, ताकि अरबों-खरबों रुपये की मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा हो सके।
इसके मद्देनजर एसडीएम ने सात महीने पहले एक करोड़ रुपये में बिक चुकी भूमि भी मंदिर को बैनामा निरस्त कराकर वापस दिला दी है। साथ ही मंदिर की निगरानी के लिए एक निगरानी समिति का भी गठन किया है।
नगर के मोहल्ला बालकरामपुरवा में गोंडा-लखनऊ मार्ग के किनारे श्री राम जानकी चतुर्भुजी मंदिर के नाम से करीब दो सौ बीघे से अधिक बेशकीमती भूमि करनैलगंज नगर, सकरौरा शहरी एवं सकरौरा ग्रामीण में है, जिसकी कीमत अरबों रुपये है।
कई वर्षों से इस मंदिर का सरबराकारी का विवाद चल रहा है। जिसे लेकर कई लोग अपनी दावेदारी भी पेश कर चुके हैं।
विगत 29 मार्च को इस मंदिर की करनैलगंज नगर में स्थित भूमि को कथित सरबराकार बाबा छविराम दास ने करीब 98 लाख रुपये में लगभग चार बीघा भूमि 13 अलग-अलग लोगों को बैनामा कर दी थी।
इस पर नगर के आधा दर्जन लोगों ने कोतवाली में 26 लोगों के विरुद्ध जालसाजी, धोखाधड़ी एवं कूटरचना के साथ ट्रस्ट की भूमि पर कब्जा करने की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराया था।
बाद में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी करनैलगंज के हस्तक्षेप पर बैनामेदारों ने अपना बैनामा स्वयं ही निरस्त करा लिया, जिससे मंदिर की बिक चुकी जमीन फिर से मंदिर को वापस हो गई।
डीएम ने पूरे मामले की जांच कराने के बाद किसी सक्षम न्यायालय से सरबराकार की नियुक्ति न होने तक उपजिलाधिकारी करनैलगंज को मंदिर व उसकी संपत्तियों की देखरेख के लिए बतौर प्रशासक नियुक्त कर दिया है।
एसडीएम वीके सिंह ने बताया कि मंदिर की समस्त संपत्तियों का ब्यौरा तैयार कर लिया गया है। एक निगरानी समिति भी गठित की गई र्है, जो मंदिर व उसकी संपत्ति की देखभाल करेगी।
15 नवंबर को इसे लेकर एक बैठक भी एसडीएम के स्तर से बुलाई गई है। जिलाधिकारी ने बैंक के लॉकर में रखी कीमती मंदिर की अष्टधातु की पांच मूर्तियों के निकालने पर भी रोक लगा दी है।
डीएम व प्रशासक एसडीएम ने संबधित बैंक मैनेजर को पत्र लिखकर बिना अनुमति के मूर्ति हस्तगत करने पर रोक लगाई है।