गोंडा। जिले की पंचायतों में हुए करोड़ों रुपये के घपले का हिसाब पिछले छह वर्षों से नहीं मिल रहा है। प्रधान और सचिवों ने अब तक कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया है। इस मामले में किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हो सकी है।
वर्ष 2018-19 और 2019-20 में 248 पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की बंदरबांट की गई। ऑडिट टीम को न तो कोई कार्य मिला और न ही कोई दस्तावेज उपलब्ध हुए। खर्च पर आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रधानों और सचिवों को नोटिस जारी की गई थी। उन्हें स्पेशल ऑडिट के लिए भी बुलाया गया था।
मगर पिछले छह वर्षों में कुल 42.48 करोड़ रुपये से अधिक का हिसाब नहीं मिल सका है। अधिकारियों का दावा है कि प्रथमदृष्टया वित्तीय अनियमितता के चलते नोटिसें दी जा चुकी हैं। ऑडिट निस्तारण के लिए अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि सभी ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों को नोटिस जारी की गई है। प्रशासन अब इन मामलों में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
अनियमितता वाली पंचायतें
वर्ष 2019-20 में कुल 196 पंचायतों में अनियमितता पाई गई थी। इनमें भोंका, चकसेनिया, चौरी, देवी तिलमहा, ढुढ़ाही, बरबतपुर, वसालतपुर, बटौरा लोहांगी, भैरमपुर, हडियागाढ़ा, हरसिंहपुर, झौहना, सोनवार, सेलहरी, असरना, बालपुर हजारी, रामगढ़, बामडेरा, वरवलिया कुर्मी, गुरसड़ा, नरदा, सुसुंडा, नरायनपुर जयसिंह, नंदौर और मोहना जैसी पंचायतें शामिल हैं। वहीं, वर्ष 2018-19 में निबिहा परसपुर और माड़ा सहित 52 पंचायतों में भी गड़बड़ी सामने आई है।