करनैलगंज। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का असर अब सरयू नदी में दिखने लगा है। सोमवार को एल्गिन चरसड़ी (एल्गिन ब्रिज) पर नदी के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। जलस्तर 104.120 मीटर से बढ़कर 104.270 मीटर पहुंचने पर केंद्रीय जल आयोग और प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए एल्गिन चरसड़ी तटबंध के निकट ग्राम बहुवन मदार मांझा के पास कटान रोधी कार्य तेज कर दिया गया है। सिंचाई विभाग की ओर से तटबंध और नदी के बीच परक्यूपाइन लगाए जा रहे हैं, ताकि तेज बहाव की स्थिति में कटान को रोका जा सके और तटबंध सुरक्षित रहे।
नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान 106.070 मीटर से करीब 1.80 मीटर नीचे है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने बताया कि सरयू नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ से जुड़े सभी विभागों को अलर्ट रहने और आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ढेमवाघाट बना सरकारी घाट, बरसात में चलेंगी मोटरबोट
विश्नोहरपुर। सरयू नदी के तेज बहाव से ढेमवाघाट पुल का संपर्क मार्ग कटने से परेशान गोंडा और अयोध्या के 50 हजार से अधिक ग्रामीणों के लिए राहत की खबर है। लोक निर्माण विभाग ने ढेमवाघाट का प्रांतीयकरण कर इसे सरकारी घाट घोषित कर दिया है।
अब बारिश के मौसम में तीन माह तक सरकार नदी के दोनों किनारों से दो-दो मोटरबोट का संचालन कराएगी। शेष अवधि में हर वर्ष पीपा पुल का निर्माण कराया जाएगा। विभाग ने इस परियोजना को स्थायी स्वरूप देने के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अब तक इस घाट पर हर साल अलग से अनुमति लेकर काम कराना पड़ता था, लेकिन अब व्यवस्थाएं नियमित हो जाएंगी।
अयोध्या-लखनऊ राजमार्ग को नवाबगंज से जोड़ने के लिए वर्ष 2016 में ढेमवाघाट पर सरयू नदी में पुल बना था। वर्ष 2022 में भीषण बाढ़ और कटान के चलते पुल का संपर्क मार्ग कई जगह बह गया। नदी का रुख बदलने से सड़क का पुनर्निर्माण भी बाधित होता रहा। समस्या से निजात के लिए आईआईटी विशेषज्ञों की राय ली गई है। उन्होंने नदी के दोनों किनारों पर दो-दो गाइड बांध बनाने की सलाह दी है, जिससे भविष्य में संपर्क मार्ग सुरक्षित रहे।
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता योगेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए घाट का प्रांतीयकरण किया गया है। स्थायी समाधान के लिए शासन को 230 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।