फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gonda News: खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर बह रही सरयू

Wed, 20 Aug 2025 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
विज्ञापन
गांव में भरा बाढ़ का पानी।
विज्ञापन
करनैलगंज/ विश्नोहरपुर (गोंडा)। बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी व बारिश के कारण सरयू नदी बुधवार को खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर पहुंच गई। मैदानी इलाकों में भी कटान तेज हो रही है। करीब 200 बीघा खेती बाढ़ की जद में है।
विज्ञापन

मंगलवार रात सरयू नदी ने ग्राम बेहटा और पारा गांव के पास कटान की। हालांकि ये गांव बाराबंकी जिले में आते हैं। गोंडा जिले के ग्राम नकहरा के किसानों के यहां खेत हैं। बुधवार सुबह कई खेत बाढ़ के पानी से लबालब दिखे। अब बचे खेतों में किसान फसल काटने में जुटे हैं। गोंडा के ग्राम बहुवन मदार मांझा और घरकुइयां के किसानों का खेती योग्य जमीन नदी में समाहित होती जा रही है।
ग्राम नकहरा निवासी मनोज कुमार, ओम प्रकाश, राम सहाय यादव का कहना है कि सभी का खेत गोंडा-बाराबंकी जिले की सीमा पर है। जो ग्राम बेहटा व पारा के पास पड़ता है। प्रतिदिन 200 बीघा से अधिक खेत कट रहे हैं। इसमें फसल लगी हुई है। मजबूरी में किसान बाढ़ से भरे पानी के बीच होकर खेत जाते हैं और अधपकी फसल को काटकर जानवरों के चारे में इस्तेमाल कर रहे हैं। उधर, घरकुइयां, बहुवन मदार मांझा निवासी मुंशीलाल, शीतल, रामसिंह का कहना है कि अधिकांश ग्रामीणों के खेत बांध के अंदर हैं। मौजूदा समय में कटान से खेत कट रहे हैं।
विज्ञापन

चंदापुर किटौली के प्रधान प्रतिनिधि ओमप्रकाश द्विवेदी का कहना है कि गांव में पानी इतना है कि नाव चल नहीं सकती, लोग पैदल निकल नहीं सकते हैं। गांव के लोगों को बहुत दिक्कत उठानी पड़ रही है।
उपजिलाधिकारी यशवंत राव का कहना है कि गांव में भरा बाढ़ का पानी निकलने लगा है। जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ की स्थिति सामान्य हो रही है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि बांध या स्पर के पास कटान नहीं हो रही है। मैदानी इलाकों में कटान रोकी नहीं जा सकती है।


किसान बोले-सब नियति का खेल हय...
विश्नोहरपुर (गोंडा)। साकीपुर के चहलावा व शुक्लपुरवा माझा में खेत बर्बाद हो रहे हैं। शेष राम के दोनों छप्पर कट चुके हैं। धरमदेई का एक छप्पर कटान की जद में है। गन्ने व धान के लगभग पांच बीघा खेत बाढ़ घटने के बाद कट गए हैं। राम मनोरथ का कहना है कि क्या करें, किससे कहें...सब नियति का खेल हय।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें