गोंडा। सरयू नदी का जलस्तर फिर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। वहीं, डिस्चार्ज हो रहे पानी से ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाव भी तेज हो रहा है। इससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। नदी के तटवर्ती ग्राम माझा रायपुर करीब एक सप्ताह से पूरी तरह जलमग्न है। सोमवार सुबह नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 27 सेंटीमीटर नीचे था, तो मंगलवार को खतरे के निशान से मात्र 14 सेंटीमीटर दूर ही रह गया।
गोंडा और बाराबंकी सीमा पर बसे छह गांव के लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। अपना आशियाना छोड़कर बांध पर ठिकाना बनाए ग्रामीण अपना खेत भी नहीं बचा पा रहे हैं। उनके खेत भी सरयू के आगोश में समाते जा रहे हैं। माझा रायपुर, पारा, बेहटा, कमियार, परसावल गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। वहीं, गोंडा के बहुवन मदार माझा के पास नदी की धारा धीरे-धीरे जमीन को काटते हुए बांध की तरफ बढ़ रही है।
गांव के रामपाल, शिव गोपाल, रामनरेश, मोहनलाल यादव, गुरुदीन, बाबादीन आदि का कहना है कि सर्दी, जुकाम, बुखार, खुजली, आंखों का लाल होना, आंखों में जलन आदि बीमारियां भी फैली हुई हैं। जिसका उपचार कराने के लिए लोगों को निजी चिकित्सक के यहां जाना पड़ रहा है। दवाएं नहीं मिल रही हैं। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह का कहना है कि नदी का जलस्तर भले ही खतरे के निशान के आसपास हो मगर बांध को किसी प्रकार का खतरा नहीं है।