गोंडा। सामाजिक क्रांति के महानायक थे संतराम बीए। उन्होंने रूढ़िवाद का खुलकर विरोध किया। जाति और वर्ग विहीन समाज का निर्माण करना चाहते थे। यह बात मुख्य राजस्व अधिकारी राजितराम प्रजापति ने संतराम बीए की 134वीं पुण्यतिथि पर डॉ. सम्पूर्णानंद सभागार में व्यक्त किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मास के राष्ट्रीय संगठक एके नंद ने कहा कि संतराम बीए की सोच थी कि मानव मानव एक समान, बौद्ध धम्म की यह पहचान। महान कर्मयोगी थे और सादा जीवन उच्च विचार के प्रतिमूर्ति थे।
वे एक महान साहित्यकार एवं लेखक थे। बाबा साहेब और राहुल सांकृत्यायन के विचारों के अनुयायी थे। वैचारिक क्रांति के महाप्राण थे संतराम बीए। दया सागर बौद्ध ने कहा कि हमे उनके विचारों को आत्मसात करना चाहिए। सविता वर्मा ने कहा कि उन्होंने मानव मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया था।
रिंकू गौतम ने कहा कि वे नारी सशक्तिकरण के प्रणेता थे। सावित्री वर्मा ने कहा कि उन्होंने साहित्य द्वारा समाज को बदलने का कार्य किया। घनश्याम प्रजापति ने संचालन और जीएल प्रजापति ने अध्यक्षता किया।
राजेश नंद ने गीतों के माध्यम से विचार व्यक्त किया। आर एल राक्षस, राम फेर प्रजापति, हनुमान प्रसाद आरके राव मीना कुमारी, नंद किशोर वर्मा एडवोकेट, ज्ञान चंद्र, राज किशोर मौर्य, सत्य नाथ प्रजापति, सतनाम प्रजापति, राजितराम, प्रभा, शिवराम, सुनीता गौतम, सुमन, अनीता, मनोज जैगढ़ी आदि ने सहभाग किया।