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मनरेगा में 74 लाख रुपये का घोटाला

Sun, 20 Sep 2015 11:12 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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मनरेगा में घोटाले की पर्तें खुलने लगी हैं। जिलाधिकारी ने अपने स्तर से जांच कराई, जिसमें पंडरीकृपाल ब्लॉक की 34 ग्राम पंचायतों में 74 लाख रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। इन ग्राम पंचायतों में श्रम और सामग्री अनुपात में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।
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इसके लिए ग्राम पंचायतवार वसूली करने की अंतिम चेतावनी देते हुए डीएम ने सीधी कार्रवाई करने की चेतावनी जारी कर दी है। ये राशि ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी/पंचायत विकास अधिकारी, तकनीकी सहायक मनरेगा, रोजगार सेवक व अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी से वसूली जाएगी।

अब इन ग्राम पंचायतों में कार्यरत इन कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों में खलबली मच गई है। इतना ही नहीं इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों के चुनाव लड़ने पर भी ग्रहण लग सकता है।
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इनसेट
ग्राम पंचायत            वसूली की जाने वाली राशि
गिलौली                395400
सेमरा दम्मन                  85600
बकठोरवा                234000
नरौरा अर्जुन                239000
तेलियानी उपाध्याय            469200
भिवपुर                    329800
कोनगवां                344172
खैरा                    262400
बेसिया चैन                314000
भीटी पटखौली            306000
मुंडेरवा कला                290600
वैनिया                    287680
चिलबिला खत्तीपुर            246600
कंधरातेजी                260400
सोनापार                282800
सुभागपुर                263104
मिश्रौलिया कानूनगो            249000
दत्तनगर बिसेन                204000
ठड़वरिया                106400
निगवाबोध                462480
इंद्रापुर                     46200
पंडरीबल्लभ                263800
खरहटिया                241160
टिकरिया                171000
तुर्काडीहा                260792
रमवापुर गोविंदा            133440
लुवांवा                    125024
धनौली                    150600
खम्हरिया हरवंश            148240
महादेवा                109000
सिसउर अंदूपुर             18600
पंडरीकृपाल                 44224
परसासोहसा                 31660
भदुवा सोमवंशी              3400
कुल                   7409776 रुपये

मनरेगा की गाइड लाइन में श्रम एवं सामग्री का अनुपात स्पष्ट है। मनरेगा के तहत कार्य कराने वाले को 60 प्रतिशत राशि श्रम पर तथा 40 प्रतिशत रकम सामग्री पर व्यय करना है। लेकिन उक्त 34 ग्राम पंचायतों में श्रम से अधिक सामग्री पर रकम खर्च कर दी गई है।

जिन ग्राम पंचायतों में मनरेगा घोटाले के तहत वसूली का आदेश जारी हुआ है, वहां के प्रधान जब तक राशि जमा नहीं करेंगे, तब तक उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा। ड्यूज न मिलने पर ये ग्राम प्रधान दोबारा प्रधानी का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चुनाव से पहले बैंक सहित योजनाओं व अन्य किसी प्रकार की देनदारी न होने का प्रमाण पत्र देना होता है।

मनरेगा में श्रम एवं सामग्री अनुपात का पालन न करना घोटाले की ही श्रेणी में आता है। जब तक उक्त राशि की वसूली नहीं हो जाती है, तब तक इन्हें नो ड्यूज नहीं दिया जाएगा। यदि कोई अधिकारी बिना राशि वसूली के अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करेगा, उसके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई होगी। सभी को तीन दिन की मोहलत दी गई है। इसके बाद भू-राजस्व की भांति वसूली की जाएगी और संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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