गोंडा। नौ की लकड़ी नब्बे खर्च। ये कहावत जिले में बाढ़ नियंत्रण के लिए बने दो तटबंधों पर सटीक बैठ रही है। घाघरा (अब सरयू) नदी का उफान रोकने के लिए वर्ष 2005 में 14 करोड़ रुपये की लागत से एल्गिन-चरसड़ी तटबंध व सात करोड़ रुपये की लागत से भिखारीपुर सकरौर तटबंध का निर्माण कराया गया था। तीन साल तक तो दोनों तटबंध सुरक्षित रहे। मगर साल 2008 से दोनों तटबंधों में कटान शुरू हुई तो इनकी मरम्मत का खेल भी शुरू हो गया। इस तरह कुल 21 करोड़ रुपये की लागत से बने इन दोनों तटबंधों की मरम्मत पर 13 साल में 346.33 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च हो चुकी है। मगर विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ के चलते ये तटबंध आज तक पक्के नहीं किये जा सके।
बाढ़ से बचाव के लिए बने ये दोनों तटबंध विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों के लिए कमाई जा जरिया बन गये हैं। नतीजतन एल्गिन-चरसड़ी तटबंध के साथ ही भिखारी पुर सकरौर बांध की मरम्मत पर इस साल भी 46 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार के जिम्मेदारों तक ने इन तटबंधों को पक्का कराने का दावा तो कई बार किया मगर इस पर अमल नहीं हो सका। तटबंधों के पक्के होने से हर साल मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिलने की उम्मीद खत्म होती दिख रही थी। शायद यही वजह है कि बाढ़ नियंत्रण विभाग हर साल तटबंधों को सुरक्षित करने का खाका पेश करके भारी भरकम बजट पास करा लेता है, मगर इन्हें पक्का नहीं कराता। संवाद
एल्गिन चरसड़ी तटबंध की मरम्मत पर हुए खर्च पर एक नजर
वर्ष - खर्च हुए बजट
- 2009 - 8. 58 करोड़
- 2010 - 9. 23 करोड़
- 2011 - 12. 68 करोड़
- 2012 - 9. 46 करोड़
- 2013 - 9. 92 करोड़
- 2014 - 11. 40 करोड़
- 2015 -10- 84 करोड़
- 2016 - 5. 83 करोड़
- 2017 - 9. 87 करोड़
चार साल में दोनों बांधों पर 249.06 करोड़ खर्च
साल 2017 तक तटबंधों की मरम्मत पर 97.22 करोड़ से अधिक बजट खर्च हो चुका था। इसके बाद भी तटबंध मजबूत नहीं हो सके। साल 2018 व 2019 में एल्गिन ब्रिज की परियोजना पर नौ करोड़ 73 लाख रुपये, एल्गिन ब्रिज पर कटान निरोधक कार्य पर 22 करोड़ आठ लाख रुपये, मरम्मत कार्य पर एक करोड़ 71 लाख रुपये खर्च हुए। सकरौर भिखारीपुर तटबंध की मरम्मत पर 20 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च हुए। बोल्डर और स्पर पर 17 करोड़ 68 लाख तथा सकरौर में कटान निरोधक कार्य पर 23 करोड़ 91 लाख का बजट खर्च हो चुका है। इसके बाद भी तटबंध मजबूत नहीं हो पाए। साल 2020 में एल्गिन-चरसड़ी, एली परसौली और सकरौरा-भिखारीपुर तटबंध पर 87 करोड़ का बजट खर्च हुआ। साल 2021 में भी दोनों बंधों के मरम्मत कार्य के लिए 44 करोड़ रुपये बजट दिया गया। इसके बावजूद तटबंध पर कार्य का सिलसिला जारी है। तटबंध को फिर मजबूत बनाने के लिए 46 करोड़ रुपये बजट जारी हुआ है। बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता बीएन शुक्ल कहते हैं कि बांध की स्थिति का आकलन करके जरूरी कार्य कराए जाते हैं। तटबंधों की सुरक्षा और मजबूती के लिए प्रस्तावों की स्वीकृति के आधार पर कार्य कराए गये हैं।
बाढ़ से निपटने को प्रशासन तैयार: डीएम
बारिश से बाढ़ की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने बचाव कार्यों की तैयारी पूरी कर ली है। जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि बाढ़ से बचाव व राहत कार्यों की प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। राहत पैकेट के साथ ही महिलाओं के लिए विशेष सहायता पैकेट भी बाढ़ के समय उपलब्ध कराए जाएंगे। 336 नावों को चिह्नित कर लिया गया है, पीएसी की एक टीम भी मुस्तैद है। इसके साथ ही एनडीआरएफ संपर्क में है। डीएम के मुताबिक अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है, फिर भी एहतियातन सभी व्यवस्थाएं कर ली गईं हैं। ड्रेजिंग मशीन से चंदापुर किटौली के पास नदी की धारा को सीधा करने का प्रयास हो रहा है। अभी धारा तटबंध से सटकर बह रही है। इसके अलावा ऐली परसौली के पास तटबंध पर भी कार्य हो रहा है, जो 80 फीसदी के करीब पूरा हो गया है। डीएम ने बताया कि राहत और बचाव कार्यों के साथ ही संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए भी तैयारी की गई है। पशुपालन व स्वास्थ्य विभाग को सतर्क किया गया है। बाढ़ कंट्रोल रूम शुरू कर दिया है। 05262- 230125 नंबर पर 24 घंटे लोगों की समस्या सुनी जाएंगी। सभी को दामिनी एप डाउनलोड करके जीपीएस ऑन करने की सलाह दी गई है। ताकि बिजली गिरने की जानकारी पहले से हो जाए। (संवाद)