गोंडा। जिले में महिलाओं की सेहत से जुड़ी तस्वीर चिंताजनक संकेत दे रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 6 के आंकड़ों में महिलाओं में ब्लड शुगर बढ़ने और वजन संबंधी समस्या तेजी से सामने आई है। 15 वर्ष से अधिक उम्र की 17.6 फीसदी महिलाओं का ब्लड शुगर 140 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक पाया गया या वे शुगर नियंत्रित करने की दवा ले रही थीं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 8.7 फीसदी था। यानी इसमें करीब दोगुना इजाफा हुआ है।
सर्वे के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष की 24.8 फीसदी महिलाएं मोटापे की श्रेणी में हैं। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 17.5 फीसदी था। यानी पांच साल में इसमें 7.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। दूसरी तरफ 24.9 फीसदी महिलाएं सामान्य से कम वजन की भी मिलीं। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में एक तरफ कुपोषण तो दूसरी तरफ बढ़ते वजन की दोहरी चुनौती सामने आती है।
160 से ऊपर शुगर वाली महिलाओं का आंकड़ा भी बढ़ा
सर्वे में 8.9 फीसदी महिलाओं का ब्लड शुगर 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक दर्ज किया गया। पांच साल पहले यह 3.7 फीसदी था। 8.1 फीसदी महिलाओं का ब्लड शुगर 141 से 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच मिला, जो पहले 3.6 फीसदी था। रक्तचाप के मामले में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर हुई है। 11.1 फीसदी महिलाओं का रक्तचाप 140/90 एमएमएचजी या इससे अधिक पाया गया अथवा वे बीपी नियंत्रित करने की दवा ले रही थीं। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 22.9 फीसदी था। गंभीर रूप से बढ़े रक्तचाप वाली महिलाओं का प्रतिशत भी 6.1 से घटकर 3.5 हुआ है।
नियमित शारीरिक गतिविधि पर दें ध्यान : डॉ. सुमन
सीएचसी मुजेहना की अधीक्षक डॉ. सुमन मिश्रा का कहना है कि अधिक वजन वाली महिलाओं को तला-भुना, अत्यधिक मीठा और ज्यादा कैलोरी वाला भोजन कम करने के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए। कम वजन वाली महिलाओं को भोजन की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। दाल, दूध-दही, अंडा या उपलब्ध प्रोटीन स्रोत, हरी सब्जियां, फल और अनाज को संतुलित तरीके से भोजन में शामिल करना उपयोगी है।
सेहत के प्रति सजगता बरतें महिलाएं
महिला अस्पताल में साथिया क्लीनिक की काउंसिलर शमा का कहना है कि महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर भी निर्णय लेने की आदत विकसित करनी चाहिए। घर के अन्य सदस्यों की जांच के साथ महिलाएं भी अपना रक्तचाप, ब्लड शुगर और वजन नियमित रूप से जांचें। किसी जांच में असामान्य परिणाम आने पर खुद दवा शुरू करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेनी चाहिए।