मनकापुर सीएचसी के रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मी की सोमवार को डेंगू से मौत हो गई। वहीं, मनकापुर क्षेत्र में ही छह लोग डेंगू की चपेट में हैं, जो अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। उधर, करनैलगंज में भी डेंगू के सात नए रोगी मिलने के बाद मरीजों की संख्या करीब एक दर्जन हो गई है। इसके अलावा वायरल, मलेरिया व टायफाइड बुखार के रोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
पांच साल पहले सीएचसी मनकापुर से रिटायर हुए लीलाधर सिंह (65) को तीन दिन पहले तेज बुखार आया। जिस पर घर वाले उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल गए। जहां जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उन्हें मेयो हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, लेकिन सोमवार को उनकी मौत हो गई।
उधर लीलाधर सिंह की मौत के साथ ही जिले में डेंगू से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढक़र एक दर्जन के करीब जा पहुंचा है। जबकि इससे बीमार होने वाले लोगों की संख्या कई दर्जन है। अकेले मनकापुर में ही इससे करीब डेढ़ दर्जन लोग बीमार चल रहे हैं।
डेंगू से हाल में बीमार हुए सीएचसी के ठीक सामने रहने वाले दिलीप गुप्ता (44) को सोमवार को उनके परिवारीजन लेकर लखनऊ गए हैं। जबकि मछलीगांव पूर्विहनपुरवा के अशोक केवट (25), कुड़ासन गांव के बाबूराम (55), वीरेपुर की प्रतिभा त्रिपाठी (21), वीरेपुर की ही कंचा देवी (70) व बैरीपुर के प्रिंस (16) अपना अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।
उधर, करनैलगंज में सकरौरा निवासी राजेश कुुमार निषाद, मौर्यनगर चौराहा निवासी संध्या व अतुल कुमार, ग्राम लालापुरवा निवासी मिथलेश कुमारी, विशाल सोनी निवासी मोहल्ला बालूगंज एवं सकरौरा चौराहा के निकट की निवासी उमादेवी को जांच के बाद डेंगू होने की पुष्टि हुई है, ये सात नए मरीज हैं जिन्हें डेंगू होने की पुष्टि हुई है। जिसमें से उमादेवी का इलाज लखनऊ मेें लोहिया अस्पताल से चल रहा है।
चिकित्सक डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि पहले मरीजों का प्लेटलेट्स की जांच कराई जाती है। कम होने पर डेंगू की जांच कराई जाती है। पुष्टि होने पर इलाज शुरू किया जाता है। उधर, सीएचसी अधीक्षक डॉ. पीएन राय ने बताया कि बुखार के मरीजों की संख्या अधिक है। जिसको आराम नहीं मिलता है तो जांच कराने के लिए लखनऊ जाने की सलाह दी जाती है या फिर अस्पताल में स्लाइड तैयार कराकर जांच के लिए भेजा जाता है।
डेंगू जांच की कोई व्यवस्था अस्पताल में नहीं है। इसके पहले ग्राम सकरौरा निवासी सतपाल सिंह व ग्राम गौरिया सेल्हरी निवासी राकेश कुमार व रमेश को डेंगू होने की पुष्टि हुई थी। जिसमें से राकेश व उसके छोटे भाई रमेश पुत्र राम गोपाल का इलाज अभी भी लखनऊ के एक अस्पताल में चल रहा है। करनैलगंज के पूर्व अध्यापक एवं जरवल कस्बा निवासी नसीर आलम का करनैलगंज में ही इलाज हो रहा है। उधर, सकरौरा चौराहे के निकट के निवासी अनिल कुमार भी डेंगू से पीड़ित हैं।