गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के 1214 प्रधान पदों के साथ ही 18271 पदों के आरक्षण की अंतिम सूची पर रोक लगने से दावेदारों में खलबली मची है। हाईकोर्ट की रोक के बाद कुछ दावेदारों की उम्मीद जगी है और वह पैरोकारी तेज कर दिए हैं।
वहीं कुछ की बेचैनी बढ़ गई है कि कहीं सीटों के आरक्षणों में बदलाव न हो जाए। सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है। अधिकारियों ने भी चुप्पी साध ली है, उनका कहना है कि फैसला आने पर ही आगे की कार्रवाई होगी। इसके लिए अभी 16 मार्च तक लोगों को इंतजार करना होगा।
प्रधान के 1214 पदों में 519 पद आरक्षित कर दिए गए हैं। जिसमें कई बड़ों की पंचायतें भी, अन्य पिछड़ा वर्ग ओर अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गई हैं। आरक्षण में बदलाव के लिए आपत्तियों के रास्ते प्रयास भी किए गए। शुक्रवार को आपत्तियों को निस्तारित करके सूची जारी करने की तैयारी पूरी हो गई थी।
माना जा रहा है कि पहले तो आरक्षण में कोई बदलाव नही हुआ था। लेकिन ऐन वक्त पर शासन ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतिम सूची जारी करने पर रोक लगा दिया। अब 16 मार्च को अंतिम सूची जारी होने की उम्मीद है, इस बीच में बदलावों या हाईकोर्ट के फैसले से पड़ने वाले असर की संभावनाओं को लेकर दावेदारों में बेचैनी है।
पंचायतों के आरक्षण पर 600 से अधिक आपत्तियों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति ने शुक्रवार को पूरे दिन मंथन किया। इसके बाद देर शाम को सूची जारी करने की तैयारी हो गई थी। इसी बीच शासन से रोक के आदेश से सारी तैयारियों पर पानी फिर गया। अब समय मिलने से किसी तरह के फेरबदल से सीटों की स्थितियों में बदलाव से दावेदारों की धड़कनें बढ़ गई हैं। सभी को हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार है।
वहीं अब संकेत मिल रहे हैं कि 16 मार्च को अंतिम रूप से सूची जारी कर दी जानी है। माना जा रहा है कि अप्रैल में ही चुनाव कराने की तैयारी आयोग कर रहा है। ऐसे में आरक्षण की कार्रवाई तिथियां तय होने से पहले पूरी कर ली जानी है। 25 मार्च तक तिथियां तय होने की संभावना के साथ ही जिले में अधिकारी और निर्वाचन विभाग के अधिकारी तैयारी में जुटे हैं।
मतदाता सूची का कार्य करीब- करीब पूरा हो चुका है। 15 मार्च तक इसकी अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। इसके बाद निर्वाचन विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल आरक्षण की अंतिम सूची जारी होने पर रोक से कईयों की बेचैनी बढ़ी हुई है।
पंचायतों के पहले चरण की आरक्षण सूची को ही दावेदार पक्का मान रहे हैं। आपत्तियों के लिए भले ही शासन ने 4 से 8 मार्च तक की तिथि तय की थी और आपत्तियां भी आईं। निस्तारण के लिए 12 मार्च तक का समय था, इसके बाद भी पंचायतों के दावेदार पहली सूची के आधार ही तैयारी में जुटे हैं। झंझरी में जिला पंचायत सदस्य के दावेदार वरिष्ठ नेता अजय पांडे प्रचार में जुटे हैं।
उनका कहना है कि समय कम है आरक्षण जो भी जारी हुआ है, उसमें बदलाव की उम्मीद कम है। ऐसे में प्रचार के लिए वह जुटे हैं। इसी तरह बेलसर के मनोज चौबे भी कहते हैं कि वह प्रचार कर रहे हैं, जनता से मिलना जारी है। आरक्षण में बदलाव की स्थिति नही दिख रही है। इसी तरह पूरे जिले में लोग जो आरक्षण तय है उसी आधार पर तैयारी कर रहे हैं।
मनकापुर के धुसवा पंचायत के प्रधान पद के दावेदार मिथलेश त्रिपाठी भी कहते हैं कि बीते 30 सालों से वह जनता के बीच बने रहे हैं, सीट अनारक्षित है और वह जनता के बीच जुटे हैं। उन्हें नही लगता की आरक्षण में कोई बदलाव होगा। इसी तरह लोगों में चुनाव को लेकर उत्साह बना हुआ है।