गोंडा। मोदी नगर में स्कूली बस की खिड़कियों में सेफ्टी रॉड न होने से एक बच्चे बाहर सिर निकालने पर लोहे के पोल से टकराने से जान चली गई। इसके बावजूद जिले के 200 निजी स्कूूलों के डेढ़ लाख बच्चे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। संभागीय परिवहन विभाग में छोटे-बड़े मिलाकर 612 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें बसें, मिनी बसें, वैन व जीपें हैं। इन्हीं वाहनों से बच्चों को स्कूल पहुंचाया, और लाया जा रहा है। 612 स्कूली वाहनों में से 335 वाहन अनफिट है। इन वाहनों को फिटनेस समाप्त हो चुका है। फिर भी स्कूल संचालक अनफिट वाहनों से बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे हैं। इधर, संभागीय परिवहन विभाग ने 450 स्कूली वाहनों के संचालकों को नोटिस जारी करके चेतावनी दी है। यदि कोई हादसा होता है तो सीधे तौर पर स्कूल संचालक व प्रबंधक को जिम्मेेदार ठहराया जाएगा।
जिले में दो दर्जन से अधिक स्कूली वाहन ऐसे भी हैं, जिनका फिटनेस के साथ रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुका है। उन्होंने रिनीवल नहीं कराया है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी व यात्रीकर अधिकारी की चेकिंग में पकड़े जाने पर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। 335 अनफिट स्कूली वाहनों के संचालकों को नोटिस भेजकर तीन दिनों में फिटनेस कराने की हिदायत दी गई है। फिटनेस न कराने वाले वाहनों का पंजीयन निरस्त किया जाएगा।
वाहनों की संख्या
ट्रक -1190
बस -465
जीप -839
कार -8400
टेंपो -410
ऑटो -150
बाइक स्कूटी -40,0000
बड़े वाहनों का फिटनेस शुल्क 800 रुपये
बस, ट्रक, मिनी बस, डीसीएम
छोटे वाहनों का फिटनेस शुल्क 600 रुपये
जीप, टेंपो, कार, बोलेरो, ऑटो, ई-रिक्शा
दो सौ स्कूली वाहनों की खिड़कियों में नहीं लगे हैं सेफ्टी रॉड
जिले में निजी स्कूलों के बच्चों को स्कूल लाने व ले जाने को लगाई स्कूूली बसों समेत हल्के वाहनों की खिड़कियों में सेफ्टी रॉड तक नहीं लगे हैं। बसों के संचालन के दौरान खिड़कियों से हाथ व सिर बाहर निकालने पर बच्चों की जान का खतरा बना रहता है। बस में चालक के साथ एक अटेंडेंट भी रहता है। बच्चों की संख्या अधिक होने से चूक भी हो सकती है। ऐसे में बच्चों के जान का खतरा बरकरार है।
एलपीजी गैस किट लगे वाहनों से पहुंचाए जा रहे बच्चे
कमाई के चक्कर में यहां एलपीजी गैस किट लगे हल्के वाहनों से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। संभागीय परिवहन विभाग से सिर्फ सीएनजी वाहन ही संचालन के अधिकृत किए गए हैं। यहां बच्चों के जान की परवाह किए बिना कमाई के चक्कर में चालक अनाधिकृत रूप से एलपीजी लगे हल्के वाहनों से बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है।
भारी व हल्के वाहनों का फिटनेस संभागीय परिवहन विभाग में किया जाता है। विभाग की तरफ से जिले में फ्रेंचाइजी की व्यवस्था नहीं है। भारी व हल्के वाहनों का अलग-अलग शुल्क निर्धारित है। संजय कुमार, संभागीय निरीक्षक प्राविधिक
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए हर माह स्कूली वाहनों की चेकिंग कराई जाती है। मौजूदा समय में स्कूलों में संभागीय परिवहन विभाग की टीम पहुंचकर स्कूली वाहनों की जांच कर रही है। बिना फिटनेस के संचालित हो रहे स्कूली वाहनों के प्रबंधकों को नोटिस भेजी गई है। बबिता वर्मा, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन/प्रवर्तन