गोंडा। निजी अस्पतालों व क्लीनिकों का पंजीकरण के नवीनीकरण का काम 10 जनवरी तक किया जाना था, लेकिन नर्सिंग होम संचालकों की लापरवाही के चलते जिले के 34 निजी अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण नहीं हो सका। रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण न कराने वालों में अधिकांश बड़े नर्सिंग होम शामिल हैं।
मिली जानकारी के अनुसार आईएमए के अध्यक्ष व सचिव के निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण नहीं हो सका है। शासन ने 10 जनवरी तक औपचारिकता पूरी कर प्रपत्रों को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में जमा न करने वालों का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा।
शासन ने इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए अप्रैल में होने वाले रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए दस जनवरी तक मोहलत दी थी। नवीनीकरण के लिए मिला समाप्त होने के बावजूद पंजीकरण का नवीनीकरण प्रकिया शुरू है। बुधवार तक जिले में संचालित 73 नर्सिंग होमों में से सिर्फ 39 का नवीनीकरण हो सका।
निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन नवीनकरण की जानकारी लेते हुए नोडल अधिकारी डॉ टीपी जायसवाल ने सभी नर्सिंग होम संचालकों को निर्देश दिए कि वो अपने अस्पताल में मानक के अनुरूप अग्निशमन की व्यवस्था सुनिश्चित कर अग्निशमन का नोडल अधिकारी नियुक्त कर उसका नाम अस्पतालों में चस्पा करवाएं।
रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले 6 नर्सिंगहोमों का बुधवार को नोडल अधिकारी डॉ टीपी जायसवाल ने निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं की स्थलीय जांच की, जिसमे एससीपीएम हॉस्पिटल , एससीपीएम मेडिकल कॉलेज, कस्तूरी हॉस्पिटल, जीवनदीप अस्पताल, देवांगन नर्सिंग होम व बॉबे नर्सिंग होम का निरीक्षण किया गया, जो मानक के अनुरूप व नवीनीकरण योग्य मिले।