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Gonda News: काम के दबाव से अवसाद में आए रामबाबू ने दी जान

Thu, 01 Jan 2026 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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रामबाबू।
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मनकापुर। मनकापुर बाजार स्थित जवाहर नगर मोहल्ला बृहस्पतिवार को शोक में डूबा रहा। सरयू नदी में इसी मोहल्ले के निवासी भारतीय स्टेट बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर राम बाबू सोनी की आत्महत्या की खबर से पूरा इलाका सन्न रह गया। यहां के जिस घर से कभी पढ़ाई और मेहनत की कहानियां निकलती थीं, वहां अब सिर्फ सिसकियां और खामोशी बची हैं। परिजनों का कहना है कि काम के दबाव से अवसाद में आकर बुधवार को उन्होंने सरयू नदी में कूदकर जान दे दी।
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बस्ती से भारतीय स्टेट बैंक के बहराइच स्थित रीजनल बिजनेस ऑफिस (आरबीओ) में तैनाती के बाद से ही वह तनाव में थे। बृहस्पतिवार को अयोध्या में पोस्टमार्टम के बाद जब शव घर पहुंचा, तो परिवार में कोहराम मच गया। बड़े भाई ओम बाबू सोनी ने बताया कि राम बाबू की वर्ष 2010 तक तैनाती असम में फील्ड ऑफिसर के पद पर थी। इसके बाद तबादले पर बस्ती आ गए। बस्ती में ही किराए पर मकान लेकर पत्नी और बच्चों के साथ रहते थे। यहां से उनका तबादला बहराइच हो गया। 25 दिन पहले ही बहराइच के आरबीओ में जॉइनिंग की थी। तभी से काम के दबाव से परेशान रहने लगे।

मां से आखिरी बातचीत...दवा लेकर निकल रहा हूं
बुधवार शाम 4:30 बजे बैंक से काम समाप्त करने के बाद राम बाबू बहराइच से अयोध्या दवा लेने गए थे। रात करीब 9:00 बजे अयोध्या से फोन करके मां शोभा देवी से बात की। बताया कि दवा लेकर निकलने वाले हैं। ओम बाबू ने बताया कि जब उन्होंने कुछ देर बाद कॉल किया, तो मोबाइल फोन स्विच ऑफ बताने लगा। काफी देर इंतजार के बाद वह परिवार के अन्य लोगों के साथ अयोध्या पहुंचे, कोतवाली पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दी। पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर लोकेशन निकलवाया। इसके बाद गोताखोरों को नदी में उतारा गया। काफी देर बाद नदी से शव मिला।
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दो बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
-ओम बाबू ने बताया कि राम बाबू की पत्नी ऐश्वर्या लक्ष्मी, बेटी ओजस्वी सोनी (13) व अनवी सोनी (10) हैं। पत्नी दोनों बेटियों के साथ बस्ती में किराए के मकान में ही रहती हैं। दोनों बेटियां वहीं पढ़ रही हैं।

राम बाबू के निधन से सहकर्मी हतप्रभ, बोले विश्वास करना मुश्किल
बहराइच। राम बाबू सोनी के आकस्मिक निधन की खबर से बृहस्पतिवार को बैंक परिसर में सभी कर्मी और अधिकारी हतप्रभ रह गए। सहकर्मी देर तक यह विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि उनके बीच मिलनसार और व्यवहार कुशल रामबाबू अब नहीं रहे। माहौल गमगीन रहा।
बैंक के रीजनल मैनेजर विवेक कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही उन्होंने सुबह अमर उजाला अखबार का पहला पन्ना देखा, सकते में आ गए। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, कल ही तो राम बाबू मुझसे अवकाश लेकर अयोध्या गए थे। कहा था कि तबीयत खराब है और दवा अयोध्या से चल रही है। इस कारण दवा लेने जाना जरूरी है। यदि मुझे इस अनहोनी का आभास होता, तो अवकाश ही नहीं देता।
रीजनल मैनेजर ने बताया कि राम बाबू सोनी ने कम समय में ही अपने मधुर व्यवहार, कार्यकुशलता और सहयोगी स्वभाव से सभी के बीच अलग पहचान बना ली थी। 30 दिसंबर को उन्होंने दोपहर में तबीयत खराब होने की बात कहकर अवकाश लिया था। सहयोगी आशीष सिंह, मयंक, तरन्नुम, अभिषेक और अनूप रंजन सहित अन्य कर्मचारी भी सदमे में दिखे।

बातचीत से हर व्यक्ति को अपना बना लेते थे राम बाबू

स्टेट बैंक मुख्य शाखा में तैनात बैंक अधिकारी वेद प्रकाश पांडेय ने बताया कि राम बाबू सोनी से कभी-कभी विभागीय कार्य से मिलना होता था। वह इतने व्यवहार कुशल थे कि हर किसी को अपना बना लेते थे। उनके द्वारा सुसाइड करने का विश्वास ही नहीं हो रहा है।
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