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बारिश से बांध के बचाव कार्य में खलल

Thu, 16 Jul 2015 11:11 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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करनैलगंज के मांझा रायपुर गांव के नजदीक घाघरा नदी लगातार एल्गिन-चरसड़ी बांध को काटने में लगी है। कल तक बांध बचाव के जिस काम में 80 मजदूर लगे थे, उनकी संख्या बुधवार की रात से हो रही बारिश के चलते गुरुवार को घटकर एक दो दर्जन रह गई। जिससे बांध बचाव के काम में खलल पैदा होने लगा है। वहीं नदी का पानी स्पर नम्बर तीन के एक चौथाई हिस्से को तो पहले ही काट चुका था, अब बचे-कुचे हिस्से को भी घाघरा नदी लील लेना चाह रही है। जिससे मजदूरों के साथ ही मौके पर कैंप कर रहे सिंचाई विभाग के अभियंता भी डरे हुए हैं। नदी की लहरों में उठने वाले मशीने का खौफ लोगों के जेहन में लगातार बना हुआ है।
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    बुधवार से लगातार रुक-रुक कर होने वाली बरसात ने बांध बचाव के कार्य में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कल तक जहां बंधे की मजबूती के लिए 80 मजदूर मौके पर काम कर रहे थे, उनकी संख्या गुरुवार को घटकर दो दर्जन हो गई। जिससे बांध बचाव के कार्य में दिक्कतें पैदा होने लगी हैं। हालांकि नदी के जलस्तर में प्रति घंटे आधे सेंटीमीटर की गिरावट अभी भी जारी है। लेकिन नदी की धारा के लगातार बंधे से सटकर बहने से एल्गिन-चरसड़ी बंधे की मुसीबतें अभी भी जस की तस बनी हुई हैं। गुरुवार को बंधे के स्पर नम्बर तीन पर घाघरा का पानी लगातार कटान करता रहा। जबकि इसके बचाव के लिए चलने वाला काम मजदूरों की कम संख्या होने के नाते सुस्त रहा।
    जेई प्रभाकर सिंह व एसके सिंह के अलावा सिंचाई विभाग का कोई भी अभियंता बंधे पर कैंप करता नहीं दिखाई दिया। वहीं बाढ़ नियंत्रण खंड से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नदी का पानी प्रति घंटे आधा सेंटीमीटर घट रहा है। हालांकि बुधवार की रात से रुक-रुक कर हो रही बारिश से नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने के कयास लगाए जाने लगे हैं। जिससे दो किलोमीटर में संवेदनशील माने जा रहे एल्गिन-चरसड़ी बंधे की मुश्किलें किसी भी वक्त बढ़ सकती हैं। सूत्रों की मानें तो बुधवार से गुरुवार के बीच पहाड़ों पर 36 मिलीमीटर बरसात होने से किसी भी वक्त बनबसा बैराज से नदी में पानी छोड़ा जा सकता है। इससे निपटने के लिए लगातार सिंचाई विभाग के अभियंता बंधे की मजबूती के काम में लगे हुए हैं। लेकिन खराब मौसम और रुक-रुक कर होने वाली बरसात बांध को क्षति पहुंचाने में आग मे घी का काम कर रही है।
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    लगतार हो रही बारिश में फिसलन के चलते बंधे पर न तो ट्रैक्टर-ट्रॉली जा पा रही है, न ही कोई अन्य भारी वाहन। जिससे बंधे के किनारे-किनारे बोल्डर डाले जाने के प्रयास बेकार साबित हो रहे हैं। ऊपर से लगातार कटान के चलते बंधे की चौड़ाई भी दिनों दिन कम होती जा रही है। जिसपर चलना खतरे से खाली नहीं है। पुराने बांध के बगल बनाए गए लगभग तीन मीटर चौडे सपोर्टेड बांध की मदद से कुछ मिट्टी बांध पर डाली गयी है। जिसमें बालू भरी बोरियों से पानी को रोके जाने की कवायदें बंधे पर चल रही हैं।

पानी के बवंडर का नाम है मशीना
मशीना का वास्तविक नाम अनं्डर माइनिंग वाटर प्रेशर है। जैसे आम तौर पर हवा के बवंडर अक्सर देखे जाते है वैसे ही ये पानी का बवंडर होता है। हवा का बवंडर हमेशा जमीन से ऊपर की ओर उठता है, जबकि पानी का बवंडर ठीक हवा के बवंडर का उल्टा होता है। इसका प्रेशर ऊपर कम और नीचे ज्यादा होता है। जो कि पानी के नीचे लगभग 30 मीटर तक का हो सकता है। इसके आने का कोई निश्चित समय नहीं होता फिर भी यह अक्सर सुबह-शाम चार बजे के करीब आता है। यह जलस्तर में तेजी के साथ गिरावट से आता है। कटान का दूसरा बड़ा कारण विन्ड प्रेशर बताया जाता है जो कि एल्गिन चरसड़ी बांध के लिए खतरनाक हो सकता है। जब पूरब या दक्षिण दिशा से तेज हवाएं चलती हैं तो इसका प्रेशर बांध पर पड़ता है। जिससे कटान होती है।

बंधे के बचाव का काम लगातार जारी है। बांध से पानी का मेन करंट अभी करीब सौ मीटर की दूरी पर है, लेकिन नदी की लहरों में उठने वाले मशीने का संकट लगातार बना हुआ है।  परंतु मशीना का खतरा लगातार बना हुआ है। हालांकि जलस्तर धीरे धीर घट रहा है इसलिए खतरा कम है। लेकिन मौसम खराब होने और बारिश तेज होने पर समस्या बढ़ सकती है।
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-एसके सिंह, जेई, सिंचाई विभाग
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