शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज से शिक्षक पात्रता परीक्षा देकर निकलते अभ्यर्थी। -संवाद
गोंडा। कई वर्ष से बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक इस बार टीईटी में परीक्षार्थी की भूमिका में नजर आए। परीक्षा केंद्रों से निकलने के बाद अधिकांश परीक्षार्थियों ने गणित को सबसे कठिन विषय बताया, जबकि बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र के कुछ प्रश्नों ने भी उन्हें उलझाए रखा। वरिष्ठ शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता पर नाराजगी भी जताई।
बहराइच के एक प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत 50 वर्षीय शिक्षिका अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि प्रश्नपत्र का स्तर सामान्य था, लेकिन गणित के प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन रहे। जरवल की 49 वर्षीय शिक्षिका नसरीन बेगम ने भी कहा कि गणित के सवालों ने सबसे अधिक समय लिया और उन्हें हल करने में परेशानी हुई। इटावा की अभ्यर्थी रौनक ने बताया कि कुल मिलाकर प्रश्नपत्र अच्छा था, लेकिन गणित में अपेक्षा से अधिक समय लगने के कारण समय प्रबंधन चुनौती बन गया। अयोध्या के मानवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र के कई प्रश्न सोचने पर मजबूर करने वाले थे। परीक्षा देकर निकले कई वरिष्ठ शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से शिक्षण कार्य करने के बावजूद टीईटी अनिवार्य किए जाने से उन्हें परीक्षा देनी पड़ रही है। अनुभव को भी पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।